भानपुर। भक्ति और ज्ञान के जागृत होने पर मानव के हृदय से प्रकृति के भेद नष्ट हो जाते हैं। वह सत्य को जानकर संसार से मोह त्याग परब्रह्म की खोज में लग जाता है। तब उसे वैराग्य की प्राप्ति होती है। ये बातें रामनगर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान लोगाें के सम्मुख भक्ति, ज्ञान और वैराग्य पर चर्चा करते हुए अयोध्या से आए आचार्य वेद प्रकाश शुक्ल ने कहीं।
उन्होंने कहा कि भक्ति को प्राप्त करने के लिए मानव को सरलता का आचरण करना चाहिए। जैसे शबरी ने राम के लिए किया था। इसके लिये उन्होंने रामचरित मानस में वर्णित नौ प्रकार की भक्ति पर सविस्तार चर्चा की। कहा कि व्यक्ति के भीतर भक्ति का भाव आने पर वह स्वत: प्रस्फु टित होने लगता है। नवधा भक्ति ही सभी तत्वों का सार है। आचार्य शुक्ल ने कहा कि ज्ञान के लिए राम और कृष्ण को जानना आवश्यक है। क्योंकि राम और कृष्ण ही पूर्ण ब्रह्म हैं। इन्हें जानने के लिए ज्ञान की आवश्यकता है। कलियुग में अज्ञानता मनुष्य के हृदय में विराजमान हो रही है। इसे नष्ट करने के लिए राम और कृष्ण के स्वरूप, नाम, लीला और धाम के विषय में चिंतन करना नितांत आवश्यक है। अनपढ़ भी मनोमार्जन के द्वारा ज्ञानी हो सकता है। उन्होंने कहा कि भक्ति हृदय में निवास करती है। ज्ञान के पुंज मस्तिष्क में विकसित होते हैं। जिससे संताप से जलता हुआ जीव भी त्रयताप से मुक्त हो सकता है। क्याेंकि जिस मनुष्य के हृदय में भक्ति और ज्ञान जाग्रत होते हैं, उसके हृदय से प्रकृ ति के सारे भेद नष्ट हो जाते हैं और वह सत्य को जान जाता है। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रमोद पांडे, उदय चंद्र, ब्रह्मदेव पाठक, राम भवन, विमल श्रीवास्तव, विरथू शर्मा आदि मौजूद रहे।