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नदियों का जलस्तर गिरा

Bijnor Updated Mon, 18 Aug 2014 05:30 AM IST
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बिजनौर/मंडावर/बेगावाला। गंगा व मालन नदी में रविवार को जलस्तर आंशिक रूप सेकम हो गया है, लेकिन तटीय गांवों में आफत अभी भी बरकार है। गांवों में पानी भरा हुआ है और फसलें जलमग्न हैं। गंगा के तेज बहाव में रावली स्थित तटबंध का एक स्टड बह गया। मालन नदी के रपटे पर पानी होने के कारण बिजनौर वाया मंडावर-हरिद्वार मार्ग दूसरे दिन भी बंद रहा। 48 घंटे के बाद तहसील प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाके की सुध ली और ग्रामीणों को राहत दिलाने का आश्वासन दिया।
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पहाड़ी क्षेत्रों में पिछले कई दिन से बारिश होने के कारण नदियों में जलस्तर बढ़ा हुआ है। हालांकि रविवार को जलस्तर में कुछ गिरावट दर्ज की गई। शनिवार को गंगा में जहां ढाई लाख क्यूसेक पानी बह रहा था तो वहीं रविवार को पानी का ग्राफ 2.19 लाख क्यूसेक पर पहुंच गया है। जलस्तर कम होने से गांवों में भरा नदियों का पानी भी कुछ कम हुआ है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानी बरकरार है। मंडावर क्षेत्र के गांव राजारामपुर, डैबलगढ़, सीमली, कोहरपुर, ब्रह्मपुरी व रावली समेत कई गांव गंगा की चपेट में हैं। ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। गंगा के तेज बहाव के कारण रावली तटबंध के बचाव के लिए बनाया गया 11 नंबर का स्टड पानी में बह गया। गंगा तेजी के साथ आबादी क्षेत्र की ओर भूमि कटान कर रही है। घराें में पानी भरा होने के कारण ब्रह्मपुरी के ग्रामीण अभी भी तटबंध पर तंबू बनाकर रह रहे हैं। नई बस्ती ब्रह्मपुरी के ग्रामीण प्रकाशे, टिकवा, पाल सिंह, चंद्रपाल, पीरू आदि का कहना है कि उनकी मदद के लिए प्रशासन नहीं आया है, वे तटबंध पर रह रहे हैं। घरों में पानी भरा है। मंडावर क्षेत्र में गंगा के पार स्थित रामसहायवाला, हिम्मतपुर बेला, इच्छावाला गांव टापू बने हुए हैं। इन गांवों के लोगों का संपर्क अन्य गांवों से टूट गया है। गांव के सभी रास्तों में पानी भरा हुआ है। ग्रामीण छतोें पर बैठे हुए हैं। वहीं कुछ ग्रामीण नाव के सहारे उत्तराखंड की ओर पलायन कर गए हैं। मालन नदी का पानी शनिवार की देर रात तेजी के साथ बढ़ा। इस नदी के पानी से बाकरपुर, मुजफ्फरपुर केशो गांव प्रभावित हैं। दर्जनों गांवों के किसानों की फसलें जलमग्न हो गई हैं। मालन नदी के पानी से रावली रपटे का मार्ग बंद है। उधर, गजरौला शिव के पास स्थित मालन नदी के रपटे पर पानी होने के कारण बिजनौर-मंडावर वाया हरिद्वार मार्ग दूसरे दिन भी बंद रहा। इस मार्ग के सभी वाहन बाकरपुर गढ़ी, इनामपुरा से होकर जा रहे हैं। दो दिन से तटीय गांव के लोग बाढ़ के कारण परेशान हैं। रविवार को 48 घंटे के बाद प्रशासन ने भी इनकी सुध ली। एसडीएम अंजूलता, तहसीलदार राजेश कुमार, नायब तहसीलदार राजबहादुर, अशोक कुमार गुप्ता ने मंडावर व रावली क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा किया।
मालन नदी के तटबंध को खतरा
मालन नदी में अगर जलस्तर बढ़ता है तो बाकरपुर का तटबंध टूट सकता है। तटबंध कई जगह से जर्जर हो गया है। बड़कला से लेकर हमीदपुर तक पक्का तटबंध बनाने की मांग लंबे समय से हो रही है, लेकिन सिंचाई विभाग के कानो पर जूं तक नहीं रेंगी। खानजहांपुर बहादर निवासी विजयपाल शास्त्री, बाकरपुर निवासी हुकम सिंह, राकेश कुमार आदि का कहना है कि हर साल यह तटबंध टूटने से मालन नदी दर्जनों गांवों में नुकसान पहुंचाती है। तटबंध पक्का बने तो ही इस समस्या से निजात मिल सकती है।
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एसडीएम साहिबा कहां गया पिछले साल का मुआवजा
बिजनौर। खादर क्षेत्र के किसान वर्ष भर मेहनत कर फसल तैयार करते हैं, लेकिन गंगा व मालन में पानी आता है और अपने साथ सब कुछ बहाकर ले जाता है। बेबस किसान करे तो क्या करे। बाढ़ से रामसहायवाल, हिम्मतपुर बेला, राजारामपुर, रामजीवाला, डैबलगढ़, कोहरपुर, मीरापुर, दयालवाला, बादशाहपुर, शहजादपुर समेत कई गांवों के किसानों की गन्ने की फसल तबाह हो चुकी हैं। हर किसान केवल यही सोच रहा है कि बच्चों की पढ़ाई, बेटी की शादी, बीमारी का इलाज खाली जेब वह कैसे कर पाएगा। इस क्षेत्र के किसानों का बाल बाल कर्जदार है। मगर जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकारी तंत्र तक कोई भी इन आंसुओं को पोछने नहीं जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों के राहत के नाम पर हर साल करोड़ों रुपया मिलता है। इस बार भी ढाई करोड़ रुपया मुआवजे के नाम पर आया है, लेकिन किसानों तक नहीं पहुंचा। पीड़ित किसानों ने रविवार को मंडावर क्षेत्र में दौरा करने गई एसडीएम मंजूलता से यही सवाल किया कि एसडीएम साहिबा अभी तक तो पिछले साल का मुआवजा भी नहीं मिला है। इस साल का कब मिलेगा, सारी फसल तबाह हो गई है। प्रशासनिक अमले ने हमेशा की तरह सर्वे कराकर नुकसान की रिपोर्ट शासन को भेजने की बात ही कही।
दो मकान बहे
रायपुर सादात। सूखरो नदी में आए उफान में दो मकान बह गए। ग्राम लालवाला निवासी भारत सिंह का पक्का और कुंवर सिंह का छप्परनुमा मकान नदी की तीव्र लहरों में बह गया। दोनों भाइयों भारत सिंह व कुंवर सिंह के बेघर होने की खबर मिलने पर एसडीएम नगीना ने गांव पहुंचकर पीड़ितों का ढांढस बंधाया। उन्होंने शासन स्तर से हर संभव आर्थिक मदद दिलवाने का आश्वासन दिया।
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