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फिर बरसे बादल, किसानों के माथे पर पड़ने लगे बल

Chitrakoot Updated Sat, 20 Jul 2013 05:32 AM IST
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चित्रकूट। किसानों ने तो अब कहना शुरू कर दिया है कि प्रकृति उनके पीछे पड़ी है। दो चार दिन आसमान खुला रहता है तो फिर बादल बरस जाते हैं। ऐसे में खरीफ की फसल के कुछ पिछड़ जाने का खतरा मंडराने लगा है। खासतौर पर तिल की फसल तो बुरी तरह से प्रभावित हो गई है।
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दो दिन आसमान साफ रहने के बाद शुक्रवार को फिर बादल बरसने लगे। इन दो दिनों में हालांकि भी इक्का दुक्का जगहों पर बारिश होती ही रही। शुक्रवार सुबह से ही बादलों की आंखमिचौनी शुरू हुई और दुपहर होते होते तेज बारिश शुरू हो गई। जिले में कई स्थानों पर बारिश की खबर है। ऐसे में खरीफ की फसल प्रभावित हो रही है। राजापुर प्रतिनिधि के अनुसार किसानों के माथे पर प्रकृति की इस लुकाछिपी को लेकर बल पड़ने लगे हैं। रायपुर के हीरालाल त्रिपाठी, चिल्लीराकस के सतेंद्र पांडे, महुआ के कंधई सिंह, भुसेली के मंगल और भदेहदू के रोशन आदि ने बताया कि अगर बारिश ने अब कम से कम 15 दिन राहत न दी तो खरीफ की कुछ फसलें तो गंभीर रूप से पिछड़ जाएंगी। सबसे ज्यादा प्रभावित तिल की फसल है, जिसका सितंबर में कटाई का काम शुरू हो जाता है और कई जगहों पर अभी तक इसकी बुआई तक नहीं हुई। इसके अलावा अरहर, ज्वार, बाजरा, मूंग की बुआई भी नहीं हो पा रही है। किसानों का कहना है कि हां, धान पर जरूर इस बारिश का ज्यादा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उसकी रोपाई इसमें भी हो जाएगी। उधर, तेज बारिश से मुख्यालय के गोकुलपुरी में कई घरों में जलभराव हो गया। लोगों का कहना है कि मंडी परिषद की चहारदीवारी की वजह से दिक्कत आ रही है। कई बार इस संबंध में जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराया गया पर हुआ कुछ नहीं।

इनसेट -------------------
अधूरे संपर्क मार्ग पर जलभराव, सीडीओ को भेजा पत्र
चित्रकूट। पहाड़ी ब्लाक के असोह गांव निवासी राजा गौतम, दिनेश पांडे, आरके पांडे, मेड़ेलाल, भगवानदीन आदि लोगों ने मुख्य विकास अधिकारी को पत्र भेजकर संपर्क मार्ग के अधूरे होने से होने वाली दिक्कतों पर ध्यान आकृष्ट कराया है। इनका कहना है कि जरा सी बरसात में जलभराव हो जाता है, जिससे पैदल निकलना तक दूभर हो जाता है। आएदिन कोई न कोई दुर्घटना होती है। कई बार इस संबंध में प्रधान, सचिव और बीडीओ से इस मार्ग को बनवाने का अनुरोध किया गया पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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