मऊ (चित्रकूट)। डोडिया फाटक को हटाकर पटरियों के नीचे से निकलने का रास्ता बनाना ग्रामीणों को रास नहीं आ रहा है। गांवों और रास्ते का गंदा पानी भर जाने से निकलने में दिक्कत आ रही है और लोग जान जोखिम में डालकर ऊपर से निकल रहे हैं। पटरियां पार कर निकलने में रोजाना बच्चों को खतरा बना रहता है, लेकिन जिम्मेदारों को चिंता नहीं।
मामला मानिकपुर-बरगढ़-इलाहाबाद ट्रैक का है। यहां पर डोडिया के पास फाटक को हटाकर नीचे से आवागमन रास्ता बना दिया गया है। आठ माह पहले कटैया डांडी और बरगढ़ के बीच का यह रेलवे फाटक बंद कर पुल का निर्माण कर दिया गया है। अब ऐसे में वैसे तो नीचे से होकर रास्ता सुगम होना चाहिए। पर ऐसा है नहीं। दिक्कत यह है कि इस रास्ते में कमर के बराबर तक पानी भरा रहता है। बारिश के मौसम में तो पानी इतना ज्यादा हो जाता है कि बच्चे तो बच्चे बड़े भी निकल नहीं सकते।
कई गांवों का है रास्ता
इस रास्ते से होकर लपांव, कटैया डांडी, पिपरहा, मनका, डोडिया, कोटवां और कोनिया तो दूसरी ओर गाहुर, रैपुरा, डूबी, बिलरा, शिवगंज के अलावा मप्र का रामबाग और डभौरा गांवों के लोगों का आना जाना है। यहीं से राजकीय इंटर कालेज, चंद्रेश इंटर कालेज, नारायण दास अग्रवाल इंटर कालेज, कार्तिकेय विद्यालय के अलावा कई परिषदीय स्कूलों के बच्चे आते जाते हैं। नीचे पानी भरा होने पर इन लोगों को ऊपर डबल लाइन से होकर आना जाना पड़ता है। ऐसे में कब कोई हादसा हो जाए कहा नहीं जा सकता।
कोई सुनता नहीं
ग्रामीण छविनंदन प्रसाद, देवराज द्विवेदी बीडीसी सदस्य, कमलाकांत, रामेश्वर प्रसाद, राजा, आत्मानंद, रविकुमार आदि ने कहा कि जब यह फाटक बंद किया जा रहा था तब रेलवे अधिकारियों से उन लोगों ने विरोध दर्ज किया था। अधिकारियों ने इस संबंध में दिक्कत होने पर व्यवस्था करने की बात भी कही थी पर इसके बाद कुछ हुआ नहीं।
तहसील दिवस में नहीं लिया गया प्रार्थनापत्र
डोड़िया माफी गांव के राजनारायण द्विवेदी ने बताया कि उन्होंने बीते दिन तहसील दिवस में प्रार्थनापत्र देकर इस रास्ते की ओर ध्यान देने के लिए अफसरों से गुहार लगाई पर यह कहकर इसे नहीं लिया गया कि यह रेलवे का मामला है। उनका कहना था कि रेलवे अधिकारी इस संबंध में बात करने को तैयार नहीं। अगर सुनवाई नहीं हुई तो अगले साल एक जनवरी को आसपास के गांवों के लोग बच्चों के साथ जोरदार आंदोलन करने को विवश होंगे। गांववालों का कहना है कि इसमें आसपास के गांवों का तो पानी आता ही है, साथ ही रेलवे ने भी एक नाला इसी तरफ कर दिया है।
अधिकारी बोले, डीआरएम झांसी से बात करें ग्रामीण
एसके पाठक चीफ पीडब्लूआई शंकरगढ़ ने कहा कि समस्या तो है। पर यह उनके स्तर के बाहर की है। डीआरएम झांसी से बात करें या पत्र व्यवहार करें तभी यह समस्या हल हो सकती है।