देवरिया/बैतालपुर। सुबह के वक्त बांकी गांव के वाशिदें अपने खेतों में गेहूं की कटाई करने गए थे। कुछ लोग गांव के बागीचे में थे। उन्हें क्या पता था कि उनका गांव कुछ देर बाद ही लोमहर्षक घटना से दहल उठेगा। आग की लपटों में घिरी तीनों मासूमों और मां की आवाज बंद कमरे में दबकर रह गई। आग में झुलस कर चाराें ने दम तोड़ दिया। लोगों की जुबां से बस एक ही अल्फाज निकल रहे थे कि आखिर यह सब क्यों और कैसे हो गया?
गौरीबाजार के उसरी मदैनी गांव निवासी तीरथ प्रजापति की बेटी धनवती की शादी वर्ष 2001 में बांकी गांव निवासी हरेंद्र प्रजापति से हुई थी। शादी के 13 वर्षों में वह तीन बच्चों की मां बन गई, जिसमें सुहानी और छोटी के अलावा 13 माह का बेटा गोकुल के पालन पोषण का जिम्मा आ गया। गांववालों के अनुसार, घटना के दिन सुबह धनवती ने खाना बनाया और बच्चों को भोजन कराने के लिए कमरे में बुलाकर कमरा बंदकर लिया। उस समय पड़ोस के लोग खेतों में काम करने गए थे। जबकि घर के बगल में ही ट्रक से बालू उतारा जा रहा था। लोगाें के मुताबिक 9: 30 के करीब धुंआ उठता देख आग लगने की जानकारी हुई। वहीं बगल के गांवों जंगल धतुरा, बौड़ी, इटवा के गांववाले मौके पर पहुंच गए। लोगों का कहना था कि लोमहर्षक वारदात देखकर हर कोई सन्न है।