स्वास्थ्य विभाग का जननी सुरक्षा का दावा खोखला साबित हो रहा है। हाल ये है कि पैसे न देने पर गर्भवती को अस्पताल में भर्ती तक नहीं किया जाता। ऐसा ही एक मामला मुस्करा सीएचसी में सामने आया है। यहां प्रसव कराने आई गर्भवती को दो हजार न देने पर बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उसने अस्पताल परिसर में ही पेड़ के नीचे बच्चे को जन्म दिया। परिजनों के हंगामे पर प्रसूता को भर्ती कर लिया। पति ने आरोप लगाया कि उपचार में लापरवाही से महिला की बच्चेदानी फट गई। पीड़ित ने डीएम से मामले की जांच की मांग की है।
मुस्करा थानाक्षेत्र के बसवारी गांव निवासी पवन पुत्र सुखलाल ने बताया कि वह गर्भवती पत्नी मांडवी को प्रसव पीड़ा होने पर 28 अप्रैल को सीएचसी मुस्करा ले गया था। जहां चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों ने प्रसव कराने के नाम पर दो हजार रुपये मांगे। रुपये न देने पर उन्होंने उसकी पत्नी को भर्ती नहीं किया। वह मांडवी को लेकर अस्पताल परिसर में ही बैठ गया। रात करीब 11 बजे नीम के पेड़ के नीचे उसने बच्चे को जन्म दिया। तब कर्मचारी उसे अस्पताल में ले गए। आरोप लगाया कि उपचार के दौरान चिकित्सक ने लापरवाही बरती। जिससे उसकी पत्नी की बच्चेदानी फट गई। हालत गंभीर होने पर चिकित्सक ने उसे रेफर कर दिया। जिस पर वह उसे झांसी ले आया। जहां उसकी पत्नी की जान बच सकी। पीड़ित ने लापरवाही बरतने वाले चिकित्सक व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग जिलाधिकारी से की है। इस संदर्भ में मुस्करा सीएचसी प्रभारी डा. रमेशचंद्रा ने कहा कि मामला सीएमओ के संज्ञान में है। वहीं से इस प्रकरण की जांच की जा रही है।