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जिले में स्वाइन फ्लू की जांच के नहीं कोई इंतजाम

Updated Thu, 04 Oct 2018 11:52 PM IST
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स्वाइन फ्लू: इलाज तो दूर जांच के भी नहीं हैं इंतजाम
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हापुड़। जिले में स्वाइन फ्लू के इलाज की तो बात ही छोड़ दीजिए, जांच तक के इंतजाम नहीं हैं। बीते तीन साल से लगातार जिले में स्वाइन फ्लू के मरीज मिलने के बाद भी अब तक यहां जांच और इलाज के जरूरी इंतजाम नहीं किए गए हैं। नतीजतन, बीमारी से पीड़ित 95 फीसदी मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है।
जिले में प्रत्येक वर्ष स्वाइन फ्लू लोगों की जान पर खतरा बनता है। बीते तीन वर्ष से इसका प्रकोप जिले में अधिक देखा जा रहा है। मुख्य बात यह है कि स्वाइन फ्लू बीमारी के लक्षण शुरूआत में पहचान में नहीं आते। तेज बुखार के साथ खांसी, जुकाम इसके प्राथमिक लक्षण हैं जो वायरल, डेंगू, मलेरिया से प्रभावित लोगों में भी देखने को मिलते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि हापुड़ को जिला बने करीब सात वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन यहां अब तक स्वाइन फ्लू की जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं। संदिग्धता के आधार पर ही अफसर मरीज का सैंपल जांच के लिए मेरठ या गाजियाबाद भेजते हैं। इस रिपोर्ट को आने में कई दिन लग जाते हैं। ऐसे में मरीज का समय पर इलाज शुरू नहीं हो पाता है और उसकी हालत बिगड़ती जाती है। ज्यादातर मामलों में इसी कारण मरीज की मौत होती है।
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इलाज के लिए सिर्फ टैमी फ्लू का सहारा
विभागीय अफसर टैमी फ्लू दवा के सहारे स्वाइन फ्लू के इलाज का दम भर रहे हैं। उनका दावा है कि वह स्वाइन फ्लू पर शिकंजा कसने में समर्थ हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिना जांच सुविधा के विभाग इन दवाओं का प्रयोग कैसे करेगा।

स्वाइन फ्लू के लक्षण
- 103 से 104 डिग्री तक बुखार रहना।
- बुखार के साथ खांसी, जुकाम होना।
- सांस फूलना, सांस लेने में दिक्कत होना।
बचाव के तरीके
0 भीड़ भाड़ वाले इलाकों में जाने से बचें।
0 मुंह पर मास्क का प्रयोग करें।
0 दिन में हाथ और मुहं साबुन से धोते रहें।
0 एक दूसरे से हाथ न मिलाएं।
0 समस्या होने पर तुरंत पंजीकृत चिकित्सक से उपचार कराएं।

कोट
स्वाइन फ्लू पर शिकंजा कसने के लिए विभाग में पर्याप्त मात्रा में टैमी फ्लू दवा उपलब्ध है। स्वाइन फ्लू पर नजर रखने के लिए टीमों का गठन किया जा चुका है। - सतेंद्र कुमार, डीएमओ
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