हरदोई। श्रीराम कथा में सोमवार को संत प्रेम भूषण महाराज ने धनुष यज्ञ व राम-सीता विवाह की कथा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि यज्ञ में कभी बुलावे की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए बल्कि बगैर बुलाये जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बड़ों की बात मानना छोटों का दायित्व है। भगवान राम ने भी गुरु की आज्ञा से धनुष भंग कर राजा जनक को चिंता मुक्त किया। संत प्रवर ने कहा कि राजा जनक द्वारा की गई धनुष भंग की प्रतिज्ञा को पूरा करने के लिए दूर-दूर से राजा आए, लेकिन कोई धनुष तोड़ने तो दूर हिलाने का साहस भी न कर सका। जिस पर राजा जनक दुखी हो गए और कहा कि यदि पहले मालूम होता कि यह धरती वीरों से हीन हो गई तो वह धनुष तोड़ने की प्रतिज्ञा नहीं कर सकते।
यह सुनकर लक्ष्मण विचलित हो गए और गुरुवर से आज्ञा मांगी। तब गुरु विश्वामित्र ने श्रीराम से कहा कि ‘उठहु राम भंजहु भव चापा, मेटहु तात जनक परितापा’। गुरु की आज्ञा मानकर श्रीराम ने धनुष उठाया उनके स्पर्श मात्र से ही धनुष टूट गया और प्रभु श्रीराम और सीता का विवाह हुआ। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल, संयोजक पीके वर्मा, चेयरमैन मीना अग्रवाल, पंचायत अध्यक्ष कामिनी अग्रवाल, पूर्व चेयरमैन उमेश अग्रवाल और रामप्रकाश शुक्ला आदि मौजूद थे।