पिहानी(हरदोई)। प्रदेश सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायोें के सार्वजनिक उपयोग के कब्रिस्तानों/अंत्येष्टि स्थलों की सुरक्षा एवं वक्फ संपति पर होने वाले अवैध कब्जे को रांकने के लिए चहारदीवारी की योजना लागू की थी। इसके लिए वर्ष 2012-13 में 200 करोड़ व 13-14 में 300 करोड़ रुपये बजट की व्यवस्था की गई। इसके बावजूद जिले में अधिकांश वक्फ संपत्तियों का कोई पुरसाहाल नहीं। स्वीकृत धनराशि भी ज्यादातर संपत्तियों पर खर्च नहीं हो सकी है। वक्फ की संपत्तियोें पर अतिक्रमण है। यह हाल शहर का ही नहीं है बल्कि कस्बोें में भी बक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर अवैध कब्जे हो रहे हैं।
शाहाबाद कस्बे में बक्फ की प्रमुख संपत्तियों में नवाब दिलेर खां का मकबरा, जामा मस्जिद और वालदा शरीफ (कदमे रसूल) शामिल हैं। पुरातत्व विभाग ने मकबरे के दिया है लेकिन बोर्ड की ओर से इस प्रमुख मकबरे की बाउंड्रीवाल नहीं बनवाई गई है। जामा मस्जिद तथा इसके अंतर्गत आने वाली 143 दुकानें वक्फ के अंतर्गत हैं। इनमें से तकरीबन एक सौ दुकानों का किराया 60 से 70 रुपये मात्र ही है। यही हाल वालदा शरीफ का है। यहां कदमे रसूल होने का दावा किए जाने से इसे आस्था का केंद्र माना जाता है। यहां भी बाउंड्री नहीं है। मोहम्मद वली, हिमायत खां, नबी वासित खां आदि ने ऐसे स्थानों पर बाउंड्री बनवाने की मांग की है। पिहानी में वक्फ बोर्ड के तहत दर्ज कब्रिस्तानों पर भी बाउंड्री न होने से गंदगी का साम्राज्य है।
बस स्टैंड स्थित कब्रिस्तान आवारा जानवरों और जुआरियों का अड्डा बना है। ज्यादातर कब्रिस्तानों का यही हाल है। ज्यादातर पर अवैध कब्जेदारों की निगाहें हैं तो कई मुकदमेबाजी के फेर में हैं। गोपामऊ में कब्रिस्तानों में कंडे पाथे जा रहे हैं। गोपामऊ का सबसे बड़ा कब्रिस्तान लालपीर का है। इस पर अवैध कब्जा है। कब्रिस्तान का दूसरा सिरा पिसावां रोड के किनारे तक है। यहां लोगों ने अवैध तरीके से मकान बना रखे हैं। उत्तर दिशा में स्थित कब्रिस्तान बलराज शाह का है। इस का अधिकांश भाग किसानों ने अपने खेतों में जोत लिया है। इसकी शिकायत स्थानीय मुसलमानों ने एसडीएम सदर से की है। संडीला में वक्फ बोर्ड की तमाम संपत्तियां हैं, लेकिन इन में केवल एक पर ही बाउंड्री है। स्थानीय लोगों ने वक्फ संपत्तियों को चहारदीवारी से घेरकर सुरक्षित किए जाने की मांग की है।
मस्जिद तक रास्ता ही नहीं
हरदोई। गोपामऊ में लालपीर में स्थित कब्रिस्तान पर अवैध कब्जा है। दूसरे सिरे पर स्थित मस्जिद के रास्तें में लोगों ने अवैध निर्माण करा लिया। इसके चलते मस्जिद तक पहुंचने का कोई रास्ता नहीं है। रास्ता न होने के सबब मस्जिद अपना अस्तित्व भी खोती जा रही है। इस समय खंडहर बनी मस्जिद की ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
मुकदमेबाजी में फंसे हैं कई कब्रिस्तान
हरदोई। अरसा-ए-दराज़ तक कब्रिस्तानों की तरफ से लापरवाही के चलते ज्यादातर कब्रिस्तानों को लेकर अवैध कब्जेदारों की दावेदारी से चली आ रही मुकदमेबाजी भी इनके जीर्णोद्धार के लिए सबसे बड़ी रुकावट साबित हो रही है। जानकारों के अनुसार पिहानी, गोपामऊ, संडीला में अवैध कब्जे के बाद जब कब्रिस्तानोें की साफ सफाई के लिए कदम उठाने चाहे गए तो अतिक्रमणकारियों के दावों के बाद नौबत मुकदमेबाजी तक जा पहुंची है। कई कब्रिस्तानों की जमीन के मालिकाना हक को लेकर अभी मुकदमे न्यायालयों में विचाराधीन हैं।