हरदोई। लोस चुनाव के लिए मतदेय स्थलों को दुरुस्त कराने को चुनाव आयोग के निर्देश के बावजूद बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में मरम्मत को आई धनराशि वापस कर दी है। इससे स्कूलों में निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है। विभागीय जिम्मेदार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल कर बचाव कर रहे हैं।
लोस चुनाव के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर परिषदीय स्कूलों में पोलिंग बूथ बनाए जाते हैं। मुख्य सचिव के निर्देश दिए थे कि पोलिंग बूथों पर व्यवस्थाओं दुरुस्त हों। स्कूल में शौचालय की व्यवस्था पंचायत राज विभाग करेगा और पेयजल व्यवस्था जल निगम। इसके अलावा रैंप आदि की व्यवस्था बेसिक शिक्षा विभाग को करनी होगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जिले के 741 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं, जिनके शौचालयों को उपयोग नहीं किया जा सकता, वहीं 217 जूनियर हाई स्कूल के शौचालय भी बदहाल हैं। जिले के 34 प्राथमिक और छह जूनियर हाईस्कूल में तो शौचालय हैं ही नहीं। पेयजल व्यवस्था के लिए भी पर्याप्त साधन नहीं हैं।
जिले के 481 प्राथमिक स्कूलों के हैंडपंप खराब पड़े हैं। वही 156 जूनियर हाईस्कूल के हैंडपंप पानी देना बंद कर चुके हैं। इसके अलावा जिले के 52 प्राथमिक और 22 जूनियर हाईस्कूल में पेयजल की व्यवस्था ही नहीं है। विभाग को जिले में अबकी 167 परिषदीय स्कूलों की मरम्मत को विभाग से 42.10 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। स्कूलों की मरम्मत कार्य को विभाग की ओर से सूची तैयार कर जिला पंचायत अध्यक्ष से अनुमोदन प्राप्त कर लिया गया था। अनुमोदन के बाद स्कूलों में निर्माण कार्य कराया जाना था, पर अनुमोदन के बावजूद स्कूलों में कार्य न करके धनराशि वापस कर दी। इससे स्कूलों की स्थित बदहाल है।
अब शासन की ओर से बूथों को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे प्रधानाध्यापक और बीईओ की नींद उड़ी है कि बगैर धनराशि के मरम्मत कार्य कैसे कराया जाए। इस बाबत वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष मौर्या का कहना था कि आचार संहिता लागू हो गई थी। इस कारण धनराशि वापस कर दी गई, जबकि बीएसए डा. वीके शर्मा बोले, समय से कार्य शुरू नहीं हो सका था, इससे धनराशि वापस की गई है। स्कूलों में रैंप आदि की मरम्मत का कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण कार्य किस निधि से कराया जाएगा, इसका जवाब वह नहीं दे सके।