कछौना/मल्लावां। 30 अप्रैल को हरदोई/मिश्रिख सीट पर मतदान होने के बाद से क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पटरी से इस कदर उतरी कि अभी तक दोबारा पटरी पर नहीं आई, जिससे लोग उमस भरी गर्मी में उबलने लगे हैं। बूढ़ा हो या जवान, बच्चे हो या घर की महिलाएं सभी बिजली क टौती से प्रभावित हैं। फिलहाल बिजली क टौती से गुस्साएं लोगों ने अब आंदोलन का मूड मना लिया है।
कछौना क्षेत्र में चुनाव से पहले बिजली ठीक ठाक मिल रही थी, पर चुनाव होते ही बिजली अपने पुराने ढर्रे पर आ गई है। यह स्थिति तब है, जब शासन स्तर से 16 घंटे बिजली आपूर्ति करने के निर्देश अधीनस्थों को दिए गए हैं और यह रोस्टर 16 मई तक के लिए लागू है। इधर, दीननगर, बनियनखेड़ा आदि गांवों में आपूर्ति ठप चल रही है। श्याममोहन, दुर्गेश, सुरेश अग्रवाल, रामशंकर, कन्हैयालाल, शिवम, नितिन, ललित, जमील, हनीफ और राहुल आदि का कहना है कि चुनाव के समय रात साढ़े दस बजे से सुबह 9 बजे तक और दोपहर 1 बजे से शाम 6 बजे बिजली दी जाती थी, पर चुनाव बाद 16 घंटे का रोस्टर एकदम लुढ़ककर 2-3 घंटे पर आ गया है। ऐसे में घरों में लगे इनवर्टर भी चार्ज नहीं पो रहे हैं।
उन्होंने डीएम से जल्द आपूर्ति बहाल कराने की मांग की है। इस बाबत जेई अंबरीश कुमार ने बताया कि जिन गांवों में आपूर्ति ठप है, वहां जल्द शुरू कराई जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कंट्रोल द्वारा जितनी बिजली मिलती है, वह ग्रामीणों को सप्लाई कर दी जाती है। उधर, मल्लावां क्षेत्र के प्रधान संघ के अध्यक्ष इंद्रपाल वर्मा ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण आम जनमानस परेशान है। बिजली न मिलने से उद्योग, लघु उद्योग, कृषि, सिंचाई आदि कार्य ठप पड़े हुए हैं। वहीं मलेरिया व टाइफाइड जैसी बीमारी भी फैलने लगी है, जिससे अस्पताल में मरीजों की लाइन लगने लगी है। लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली कटौती क्षेत्रीय नेताओं के इशारे पर जनता को परेशान करने के लिए की जा रही है।
उन्होंने डीएम से मांग की कि जनहित में क्षेत्र में बिजली का शेड्यूल लागू कराया जाए, साथ ही चेताया कि यदि बिजली कटौती जल्द बंद न हुई तो जनता सड़क पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेगी।