मल्लावां। क्षेत्रीय गांव हेरवल में ठाकुर जी महाराज मंदिर पर शुक्रवार को श्रीमद्भागवत कथा का समापन हुआ। इस अवसर पर भंडारे का आयोजन क र श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।
वृंदावन से पधारे कथा व्यास अविचल पांडेय ने कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान को पाने के लिए ज्ञानी होना नहीं बल्कि प्रेमी होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूजा पाठ से बेहतर प्रेम है, जिससे भगवान जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं। उन्होंने प्रेेम का महत्व समझाते हुए चौपाई ‘लगन तुमसे लगा बैठे जो होगा देखा जाएगा तुम्हें अपना बना बैठे जो होगा देखा जाएगा’ प्रस्तुत कर श्रोताओें को भावविभोर कर दिया। आचार्य ने कहा कि गोकुल, वृंदावन, मथुरा में लीलाएं कर श्रीकृष्ण ने समुद्र किनारे द्वारिकापुरी का निर्माण कर रुक्मणी के साथ विवाह किया। वहीं सोलह हजार एक सौ आठ रानियों का उद्धार कर बचपन के मित्र सुदामा का भी कल्याण किया।
आचार्य ने कहा कि सुदामा की भक्ति के वशीभूत होकर भगवान श्रीकृष्ण ने जो सम्मान व प्रेम सुदामा को दिया वह अतुलनीय है। आचार्य ने सुखदेव व राजा परीक्षित की भी कथा सुनाई। इससे पहले श्रीकृष्ण व रुक्मणी का विवाह संपन्न हुआ। श्रृद्धालुओं ने भगवान व श्रीमद्भागवत की आरती उतारी। इस मौके पर आशाराम, प्रदीप त्रिवेदी, सरोज सिंह, संदीप सिंह, पंकज पटेल, श्रीकृष्ण, सुनील कुमार, परशुराम, सुभाष चंद्र, राकेश, धनीराम कनौजिया आदि मौजूद थेे। समापन के बाद ओम प्रकाश कनौजिया ने आचार्य व संगीत टोली समेत सभी श्रोताओं के प्रति आभार जताया।