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‘प्योरिटी’ के नाम पर नहीं ‘स्योरिटी’

Hardoi Updated Tue, 27 May 2014 05:34 AM IST
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हरदोई। प्लेटफार्म से लेकर ट्रेनों में अवैध वेंडरों की पैठ दिनों दिन बढ़ती जा रही है। शीतल पेय पदार्थों से लेकर खाद्य सामग्री में धड़ल्ले से गोरखधंधा हो रहा है। स्टेशन पर अवैध वेंडराें का गोरखधंधा चोरी छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम हो रहा है। शीतल पेय पदार्थ के नाम पर यात्रियों को मीठा जहर बेंचा जा रहा और इसमें रोजाना लाखों की कमाई हो रही, जिसमें रेलवे के तमाम लोग बराबर का हिस्सा लेते हैं।
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यात्री तो गर्मी से सूख रहे गले को तर करने को पानी और पेय पदार्थ खरीदते हैं, पर उन्हें क्या मालूम कि इस पेय पदार्थ के स्थान पर उन्हें मीठा जहर पीने को दिया जा रहा है। इसी प्रकार पानी की बोतलों को देख कर भले ही वह मिनरल वाटर लगता है, पर हकीकत तो यह कि उन बोतलों में भी स्टेशन पर ही टंकियों से भरा गया पानी है, जिस पर टेप लगाकर उन्हीं बोतलों में भर कर बेंचा जा रहा, जिसे यात्री प्रयोग करने के बाद उठाकर फेेंक देते हैं। खाद्य पदार्थाें में भी यही स्थिति है। अधिकृत रेलवे कैंटीनों के अतिरिक्त रेलवे स्टेशन पर तमाम अनाधिकृत कैंटीनों का संचालन अफसरों की आंखों के सामने हो रहा है और उन पर आधा सैकड़ा से अधिक वेंडर काम कर रहे हैं, जो संक्रमित भोजन की बड़े ही धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं।
अवैध वेंडर भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में यात्रियों को ऐसे ही पदार्थ बेंचकर मेहनत की कमाई को काली कमाई के रूप में ठग रहे हैं, जिससे यात्रियों के स्वास्थ्य पर तो हानिकारक साबित हो रहा, वहीं यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है। उधर, ट्रेनों से लेकर स्थानीय रेलवे स्टेशन पर बिक्री करने वाले अवैध वेंडरोें को नकली शीतल पेय बनाकर बेंचते हुए बड़े ही आसानी से पकड़ा जा सकता है। वेंडरों द्वारा स्वाद वाली नकली शीतल पेयों को बनाकर बेंचा जाता है। कंपनियों के खाली बोतलों में पेय पदार्थ तैयार कर भरा जाता है। गोरखधंधे से जुड़े लोगों के अनुसार एक पैकेट रसना या पीले, नारंगी रंग में सकरीन मिलाकर शीतल पेय तैयार कर लिया जाता है। एक बोतल की कीमत बर्फ समेत करीब दो से तीन रुपये आती है।
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ऊपर से अन्य खर्चा जोड़कर अवैध वेेंडरों को यह बोतल पांच से छह रुपये में पड़ती है, जिसे आसानी से 10 रुपये से लेकर 12 रुपये में बेंच लिया जाता है। नहीं बिकने पर बोतलों के दाम तक कम कर दिए जाते हैं। गर्मी में सबसे ज्यादा जरूरत पानी की पड़ती है। ऐसे में पानी की बिक्री इस समय सबसे कारगर कारोबार है। बाजार में तो पानी के कई ब्रांड बिक रहे हैं, पर स्टेशन और ट्रेनों के अंदर ऐसे ब्रांड देखने और पीने को मिल जाते हैं, जो कभी सुने नहीं गए। यात्री तो इन बोतलों को मिनरल वाटर समझकर खरीदते हैं, पर हकीकत तो यह है कि यह मिनरल वाटर नहीं, बल्कि रेलवे स्टेशन पर बनी टंकी का ही पानी है। जिसे बोतलों में भरकर बेंचा जा रहा है।
इतना ही नहीं पानी भरने को नई बोतलों का प्रयोग भी नहीं किया जाता और यात्रियों के प्रयोग के बाद फेंकी गई बोतलों को ही उठाकर उनमें ही दोबारा पानी भरकर बेंच दिया जाता है। उधर, स्थानीय प्लेटफार्म के नजदीक ही तमाम अनाधिकृत कैंटीन संचालित है। जिस पर खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता का भी ध्यान नहीं रखा जाता है। रेलवे स्टेशन के आसपास करीब आठ अनाधिकृत कैंटीनें संचालित हैं, जो मिलावटी तेल मसालों से खाद्य पदार्थ बनाकर यात्रियों को परोसते हैं, जबकि भूख से बेहाल यात्री किसी गुणवत्ता पर ध्यान दिए बगैर खाद्य पदार्थों का सेवन कर अपने स्वास्थ्य से खिलवाड़ करते हैं। स्टेशन पर लाइसेंस धारक करीब सात कैंटीन हैं, जिन पर कुल 35 से 40 लाइसेंस धारक वेंडर काम करते हैं, जबकि अनाधिकृत वेंडराें के काम करने की तादाद कहीं अधिक है।
स्टेशन से जुड़े एक वेंडर ने बताया कि इस समय सीजन चल रहा है। ऐसे में इन दिनों यहां पर 45 से 50 के करीब वेंडर काम कर रहे हैं, जो बाहर बनी कैंटीनों से खाद्य सामग्री व पेय पदार्थ लाकर बिक्री करते हैं। बताया कि स्टेशन पर बिक्री करने में थोड़ी परेशानी आती है, पर सब कुछ मैनेज हो जाता है।
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ट्रेनों में बिक्री के लिए तय होते रूट-रेट
हरदोई। ट्रेनों में नकली शीतल पेय व खाद्य पदार्थ बेंचने में सभी की मिलीभगत होती है। एक वेंडर ने बताया कि ट्रेन में बिक्री करने में साहब का सहयोग रहता है। स्टेशन के जिम्मेदार से लेकर सुरक्षा कर्मियों को सुविधा शुल्क दिया जाता है। ट्रेन में बिक्री को हर रूट के अलग रेट तय हैं। हरदोई से बालामऊ तक बिक्री करने का रेट अलग है और हरदोई से संडीला तक का दूसरा रेट है। ऐसा ही ही शाहजहांपुर की तरफ भी होता है। बताया कि जो रेट लेते हैं वह सुरक्षा की जिम्मेदारी भी लेते हैैं।
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स्टेशन पर नहीं दिखता अब रेल नीर
हरदोई। रेलवे ने खाद्य एवं पेय पदार्थों के बिक्री की जिम्मेदारी आईआरसीटीसी को सौंपी है। जिससे ही अधिकृत सामग्री को बेंचने की अनुमति है, पर स्टेशन पर रेलवे के इस नियम का पालन नहीं होता है। स्टेशन पर अवैध वेंडरों के पास तो आईआरसीटीसी से अधिकृत सामग्री मिलना संभव नहीं है। अधिकृत कैंटीनों के पास भी तमाम जरूरी खाद्य व पेय पदार्थ नहीं है। जिसमें से एक रेल नीर तो स्टेशन पर कहीं भी बिकने को नहीं मंगाया जाता है।
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स्वास्थ्य के साथ सुरक्षा से भी खिलवाड़
हरदोई। नकली पेय पदार्थ व मिलावटी खाद्य पदार्थ को यात्री तो जरूरत पड़ने पर खरीदते हैं, पर यह सामग्री यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ ही सुरक्षा पर भी सवाल खड़ा कर देती है। ज्ञात हो कि कई बार अवैध वेंडराें से खरीदी गई सामग्री का प्रयोग कर यात्री कई बार जहरखुरानी का शिकार भी हो गए। जिसके कई मामले प्रकाश में आए, जिसके बाद ट्रेनों और प्लेटफार्म पर सख्ती बरती गई, पर बाद में स्थिति जस की तस आ गई।
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‘नकली शीतल पेय मीठे जहर का काम करते हैं। उनमें मिले घातक रसायन व खाद्य पदार्थ में मिलावट आंत और लीवर पर फर्क डालते हैं। साथ ही तमाम अन्य बीमारियां भी हो जाती हैं।’ डाक्टर विजय त्रिवेदी
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‘अनाधिकृत वेंडरों को पकड़ने को चेकिंग स्टाफ द्वारा कार्रवाई की गई और अभी हाल में ही वेंडरों को पकड़ कर उनको जेल भेजा गया है। वैसे उनकी ओर से अफसरों को समय-समय पर अवगत कराया जाता है।’ रामरतन, स्टेशन अधीक्षक
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‘स्टेशन पर अवैध वेंडरों पर रोेकथाम लगाने को कई बार धरपकड़ की गई और प्रतिमाह वेंडरों को जेल भेजा जाता है। ट्रेनों में भी चेकिंग अभियान चलाकर वेंडर पकड़े गए हैं।’ आरएस ग्रर्व्याल, प्रभारी आरपीएफ
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