हरदोई। खाद्य पदार्थो की बिक्री, निर्माण और वितरण से जुड़े दुकानदारों और एवं व्यापारियों के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य किए जाने के बाद भी जिले में बिना पंजीकरण कराए धड़ल्ले से खाद्य पदार्थो का कारोबार हो रहा ह। इसके प्रति जिम्मेदार बेखबर बने हुए है।
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 31 (1) के अनुसार खाद्य पदार्थो की बिक्री एवं निर्माण बिना पंजीकरण या लाइसेंस के नहीं किया जा सकता है। यही कारण है छोटी चाय की दुकानों, चाट पकौड़ी के ठेलों एवं समोसा, मिठाई, गुड, बताशा की दुकानों से लेकर बड़े होटल. रेस्टोरेंट और खाद्य प्रदार्थों का कारोबार करने वालों के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है मगर जिले में इसको लेकर खेल हो रहा है। जिले भर में खाद्य पदार्थो की बिक्री एवं निर्माण का कारोबार करने वाले अस्थाई एवं स्थायी दुकानों, ठेलों, खोमचों आदि की संख्या 10 हजार से अधिक होने का अनुमान है। मगर इसके सापेक्ष अभी तक पंजीकरण एवं लाइसेंस लेने वालों का आंकड़ा तीन हजार के आस पास है। जब कि नियमानुसार शत प्रतिशत दुकानदारों एवं करोबारियों का पंजीकरण किया जाना है। पंजीकरण वर्ग में किराना स्टोर, जनरल स्टोर, डेरी, दूधिए, केटरिंग करने वाले, ढ़ाबा, होटल, रेस्टोरेट, परचून की दुकान, गट्टा बताशा, टिक्की, समोसा, मटर, चाट, गोलगप्पा, सहित अन्य खाद्य पदार्थो से संबंधित मिले, दुकाने तथा ठेले आदि शामिल है मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बिना पंजीकरण या लाइसेंस के खाद्य पदार्थ बेंचने का कारोबार करने वालों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत 6 माह तक की कैद या 5 लाख तक का जुर्माने की सजा हो सकती है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी एसके मिश्रा ने बताया अभी तक करीब चार हजार पंजीकरण एवं लाइसेंस दिए जा चुके हैं। जल्द अभियान चलाकर पंजीकरण न कराने वालों के खिलाफ कार्यवाई की जाएगी।