हाथरस। आलू किसानों को अब मंदी की मार झेलनी पड़ रही है। इसका प्रमुख कारण जिले में आलू के भाव खुदरा बाजार पर निर्धारित होना है। फसल पर 400 रुपये बोरा के भाव में बिकने वाले 50 किलो आलू के बोरे के भाव अब 300 रुपये के आसपास हैं। अब बाजार में हल्द्वानी आलू के आगमन का असर भी कीमतों पर दिखाई देने लगा है। जिससे आलू किसान काफी परेशान हैं। इस वर्ष आलू की अधिक पैदावार होने का परिणाम यह रहा कि जिले के करीब 160 कोल्ड स्टोर 80 फीसदी तक फुल हो गए। फसल पर भी आलू का मूल्य किसानों को 350 से 400 रुपये 50 किला का बोरा मिल रहा था, लेकिन किसानों ने अधिक मूल्य पाने की चाहत में अपने आलू को बेचने के स्थान पर भंडारण करना ही उचित समझा। फसल के दौरान महाराष्ट्र के साथ मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में आलू की पैदावार कम होने के कारण स्टॉकिस्ट मान रहे थे कि इस बार कोल्ड स्टोर में आलू के रखने के बाद अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी अंदाजे के कारण स्थानीय मंडियों में आलू की मांग काफी रही। आलू की खुदाई से पहले ही सौदेबाजी करने वाले व्यापारियों ने लाखों के वारे न्यारे इस बार कर लिए। बारिश शुरू होने के बाद भी किसान कोल्ड स्टोर से आलू की निकासी करने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं। जबकि अक्तूबर माह में नई फसल की धराई की तैयारी होनी है। आलू किसान भले ही आलू की मंदी की मार से परेशान है, लेकिन बिचौलिये अब भी खूब कमाई कर रहे हैं। खुदरा बाजार में अक्सर देखा जा रहा है कि घटिया क्वालिटी का आलू भी 10 से 12 रुपये किलो है, जबकि अच्छे आलू की कीमत 16 से 18 रुपये किलो तक है। जिससे देखा जा रहा है कि बिचौलिए अब भी आलू के भाव किसान को 6 रुपये किलो और बाजार में 18 रुपये किलो है। इस सब के पीछे शासन की कोई ठोस रणनीति न होना प्रमुख समस्या है। जिसका यह बिचौलिया खुलकर लाभ उठा रहे हैं। जिले में हाथरस, सादाबाद, सासनी में आलू बहुतायत में पैदा होता है। जिससे इन क्षेत्रों का आलू देशभर की मंडियों में पहुंचता है। दक्षिण भारत के कर्नाटक, आंध्र प्रदेश के साथ तमिलनाडु का आलू भी बाजार में आ चुका है। इससे यहां के आलू की मांग घट गई है। इसी से किसानों को नुकसान होगा। इस बार अभी तक शीतगृहों से औसत आलू की निकासी 50 से 55 फीसदी ही हुई है। जबकि पिछले वर्ष इस अवधि में 70 से 75 प्रतिशत तक आलू की शीतगृहों से निकासी हो चुकी थी। कोल्ड स्टोरों से आलू की निकासी न होने से शीतगृह मालिक भी परेशानी बढ़ती जा रही है। बारिश के कारण शीतगृहों में भंडारित आलू अब दागी भी हो गया है। जिससे किसानों के साथ कोल्ड स्टोर मालिकों के भी होश उडे़ हुए हैं। कोल्ड स्टोरेज स्वामियों का प्रयास है कि किसान शीघ्र अपने आलू की निकासी करें। जिससे आलू के खराब होने से उनके कोल्ड की होने वाली बदनामी से बचा जा सके।
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