एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

ब्लड बैंक पर ताला, नहीं हो पाया मुआयना

Hathras Updated Tue, 01 Oct 2013 05:37 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

हाथरस। जिला अस्पताल में ब्लड बैंक तो है और वहां 24 घंटे सेवा का बोर्ड भी लटका है, लेकिन इस ब्लड बैंक में 24 में से 18 घंटे ताला लटका रहता है। दिन हो या रात, अक्सर इमरजेंसी में खून लेने के लिए आने वाले तीमारदारों को यहां इंतजार करना पड़ता है। सोमवार को तो डीआई ने जब ब्लड बैंक पर ताला लटका देखा तो वह बिना निरीक्षण के ही वापस लौट गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला अस्पताल में वर्ष 2009 में ब्लड बैंक की स्थापना हुई। उससे पहले यहां मरीजों को खून के लिए अलीगढ़ या आगरा भागना पड़ता था। ऐसे में तीमारदार मरीजों को ही उपचार के लिए बड़े शहर ले जाते थे। ब्लड बैंक की स्थापना के बाद लोगों को लगा कि कम से कम यहां खून तो अब सुलभता से मिल जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसकी मुख्य वजह यहां जिला अस्पताल में एक एलटी की ही तैनाती है। उसी एलटी पर प्रयोगशाला का काम है और उसी पर ब्लड बैंक का। ऐसे में अक्सर ब्लड बैंक पर ताला लटका रहता है और खून के लिए मरीजों के तीमारदारों को काफी परेशानी होती है। ब्लड बैंक पर कम से कम चार एलटी और एलए की ड्यूटी होनी चाहिए, लेकिन यहां स्टाफ की किल्लत से ब्लड बैंक जूझ रहा है। सोमवार को जब औषधि निरीक्षक मनुशंकर इसका निरीक्षण करने के लिए गए तो वहां ताला लटका हुआ था। इस पर ब्लड बैंक का निरीक्षण नहीं हो सका और वह वापस लौट आए।
--
सरकारी अस्पतालों की दवा के नमूनों की होगी जांच
हाथरस। अब जिला अस्पताल और अन्य सरकारी अस्पतालों की दवाओं का भी हर तीन माह बाद नमूना लेकर इन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। हाल में ही यह मामले सामने आए हैं कि सरकारी अस्पतालों के अलावा सीएमएसडी में रखी दवाओं के नमूने भी फेल आए हैं। लखनऊ से शासन द्वारा भेजी गई दवाओं के अलावा यहां से स्वास्थ्य विभाग द्वारा खरीदी गई दवाओं के नमूने फेल आने से अब शासन ने आदेश दिया है कि हर तीन माह में सरकारी अस्पतालोें में भी दवाओं के नमूने लेकर इन्हें परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। डीआई मनुशंकर का कहना है कि अब जल्द ही सरकारी अस्पतालों की दवाओं के नमूने लिए जाएंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें