हाथरस/सहपऊ। जीवन के 90 बसंत देख चुके स्वाधीनता सेनानी कुंवरजीलाल आर्य को इस बात का अफसोस है कि आजादी की जंग लड़ते समय जिस भारत की उन्होंने कल्पना की थी, आज वह भारत भ्रष्टाचार के चंगुल में जकड़ा हुआ है। उनका कहना है कि भ्रष्टाचार इस देश की सबसे बड़ी समस्या है और लोगोें को खुद इससे लड़ने के लिए आगे आना होगा। सहपऊ के गांव पीहुरा के कुंवरजीलाल आर्य ने 1942 से लेकर देश के आजाद होने तक कई बार अंग्रेजी हुकूमत का मुकाबला किया। वह महात्मा गांधी के आंदोलन से भी जुड़े तो सुभाष चंद्र बोस ने भी उन्हें प्रेरित किया। कई आंदोलनों में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और जेल भी गए। आर्य और उनके साथियों ने सोचा था कि जब देश आजाद होगा तो यह सोने की चिड़िया होगा, लेकिन हुआ इसके विपरीत। आजादी के बाद जब देश आजाद हुआ तो आर्य ने केएस इंटर कॉलेज महरारा में अध्यापन कार्य शुरू किया। वह 40 साल गांव के प्रधान रहे और दो बार जिला पंचायत सदस्य भी रहे। जब देश के वर्तमान स्वरूप की बात की जाती है तो उनके दिल में एक हूक सी उठती है। उनका कहना है कि भ्रष्ट नेताओं ने इस देश की हालत बिगाड़ कर रख दी है। नेता जनता से कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं। आज देश में चारों तरफ भ्रष्टाचार फैला हुआ है। जब तक देश में बदलाव नहीं आएगा और जनता की प्रवृत्ति नहीं बदलेगी, तब तक हालात नहीं सुधरेंगे। उनका यह भी कहना है कि अन्ना हजारे अच्छा काम कर रहे हैं, लेकिन अकेले अन्ना देश को भ्रष्टाचार से मुक्त नहीं करा सकते। इसके लिए जनता को खुद खड़ा होना होगा।
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