हाथरस। आईएम के आतंकी फसीह मोहम्मद को सऊदी अरब द्वारा भारत को सौंपे जाने के बाद उसके नाम से यहां एआरटीओ कार्यालय से बने ड्राइविंग लाइसेंस का मामला फिर गरमा सकता है। इस मामले में अभी तक जांच अधर में है और कोई रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई है। उल्लेखनीय है कि गत 21 अगस्त को यहां एआरटीओ ऑफिस से इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी फसीह मोहम्मद के नाम से एक लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बन गया था। इसमें फर्जी कागजात लगाए गए थे। यह डीएल फसीह मोहम्मद पुत्र फिरोज अहमद निवासी लाला का नगला के नाम से बना था। इस पर फसीह मोहम्मद का ही फोटो लगा था। राशन कार्ड, एलआईसी का पॉलिसी ब्रांड आदि दस्तावेज फर्जी लगाए गए थे। कुछ दिनों बाद जब यह खुलासा हुआ था कि आतंकी फसीह मोहम्मद के नाम से यहां से लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस बन गया है तो विभाग में खलबली मच गई थी। अधिकारियोें को कई दिनों तक तो जवाब ही नहीं सूझा। इधर, आतंकी फसीह मोहम्मद सऊदी अरब में वहां की पुलिस की गिरफ्त में था। आईएम के इस आतंकी के नाम से फर्जी लाइसेंस कैसे बन गया, इसका उत्तर किसी अधिकारी के पास नहीं था और इस लाइसेंस को बनवाने के पीछे आखिर क्या मकसद था, इसका जवाब भी अधिकारी नहीं दे पाए थे।
इस मामले में तदुपरांत जांच शुरू हुई। आरटीओ अलीगढ़ विक्रम सिंह ने लापरवाही के आरोप में इस मामले में लिपिक राजकुमार शर्मा को तत्काल निलंबित कर दिया था। शासन ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए आरआई केसी शर्मा को निलंबित कर दिया था। पूरे मामले की जांच एआरटीओ एटा को दे दी थी। यह माना जा रहा था कि इस गंभीर मामले में विभाग की ओर से रिपोर्ट तो दर्ज होगी ही लेकिन विभाग ने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। इधर, स्थानीय पुलिस प्रशासन ने प्रारंभिक छानबीन की थी लेकिन बाद में यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया था। अब फसीह मोहम्मद को सऊदी अरब ने भारत को सौंप दिया है। ऐसे में यहां से उसके नाम से बने डीएल का मामला फिर गरमा सकता है। आखिर फ सीह मोहम्मद के नाम से यहां लर्निंग डीएल क्यों बनवाया गया, जैसे सवालों के उत्तर की जांच अब गहनता से हो सकती है हालांकि अभी तक पूर्व में विभागीय जांच ही अधर में है।