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स्कूल की कहानी, छत से टपक रहा पानी

अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 07 Jul 2016 01:08 AM IST
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schools, lalitpur hindi news - फोटो : amar ujala
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कुम्हैड़ी (ललितपुर)।  लाखों रुपये खर्च करके बनाया गया राजकीय हाई स्कूल की इमारत की पोल पहली बारिश में ही खुल गई। लाखों रुपये खर्च करके बनाई गई इमारत में पहली बारिश में ही जगह-जगह से पानी रिसने लगा है। दिलचस्प बात यह है, कि इमारत का निर्माण हुए अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है।
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शासन की ओर से जनपद में शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए 14 नए राजकीय हाई स्कूल स्वीकृत किए गए थे। लेकिन शासन विद्यालय के भवनों को मानक के अनुसार निर्माण कराने में सफल नहीं हो रही है। जिसका उदाहरण कुम्हैड़ी में नवनिर्मित राजकीय हाई स्कूल में देखने को मिला है। इमारत को बने हुए एक  वर्ष भी नहीं हुआ और इमारत की छत से पानी कुछ इस तरह टपक रहा है, जैसे भवन के अंदर ही बारिश हो रही हो।

स्थिति यह है कि बच्चों ने विद्यालय आना कम कर दिया है। जो बच्चे आते हैं कक्षा के एक कोने में सिमट कर बैठ जाते हैं या बाहर बरामदे में खड़े रहते हैं। विद्यालय में पांच कक्षाएं, दो कार्यालय के लिए ऑफिस, एक लैब में का निर्र्माण हुआ है। पहली बारिश में इमारत की हालात देखकर यह भरोसा ही नहीं होता है, कि यह इमारत एक वर्ष पूर्व ही बनकर तैयार हुई है।  
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ज्ञातव्य है कि विद्यालय का वर्ष 2010 में स्वीकृत हुआ था इसकी कार्यदायी संस्था पैक्सपेड ने इमारत का निमार्ण 2011 में काम शुरू कराया था।  जिसके लिए शासन ने 58 लाख 12 हजार की धनराशि स्वीकृत की थी। जिसमें से एक कमरे का कम निर्माण होने के कारण 7 लाख रुपये काट कर कंपनी को 51 लाख 98 हजार रूपयें का भुगतान किया गया था। लेकिन ठेकेदारों ने मानक के विपरीत इमारत का निर्माण कराया है। जिसकी बानगी इमारम के जगह-जगह दीवारों में दरारें स्पष्ट बयां कर रही है, सभी कमरों के फर्श टूट चुके है।

धांधली की बू इस लिए आ रही है, क्योकि इमारत के निर्माण के समय इंजीनियर द्वारा गुणवत्ता की जांच हुई इसके बाद भुगतान की किस्तें रिलीज हुई। विद्यालय में कक्षा 9 में 127 और कक्षा 10 में 132 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत है। विद्यालय में इस वर्ष अध्ययन कार्य में यह बारिश सबसे बड़ी बाधा बन गई है। कक्षाओं में मैदानी बारिश जैसा नजारा दिखाई देता है। इस समस्या की जानकारी विद्यालय के प्रधानाचार्य गोविंद राजपूत ने जिला विद्यालय निरीक्षक को फोन पर व लिखित रूप में दी है। प्रधानाचार्य ने यह भी बताया कि उन्होने कई बार संबंधित ठेकेदार को फोन पर विद्यालय की समस्या बताई, लेकिन हर बार ठेकेदार ने 2-3 दिन का समय मांगा लेकिन अब तक इमारत में कोई सुधार नहीं हुआ है।

पढ़ाई हुई ठप
पिछले दिनों हुई बारिश के बाद इस इमारत में बैठकर पढ़ाई कर पाना मुश्किल है। इस कारण से स्कूल में उपस्थिति कम हो गई है। कक्षाओं के साथ ही कार्यालय व लैब में पानी रिसने से दस्तावेज व जरूरी सामान खराब हो रहे हैं।
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