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अजोम कुंड में जलीय जीवों पर संकट

Mainpuri Updated Sat, 04 May 2013 05:30 AM IST
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औंछा। 88 हजार ऋषियों की तपोस्थली माने जाने वाले औंछा क्षेत्र में च्यवन ऋषि का मंदिर है। मंदिर परिसर के पीछे अजोम कुंड है। इस कुंड में सर्दियों में जहां प्रति वर्ष हजारों की संख्या में अप्रवासी पक्षी आते हैं वहीं इन दिनों स्थानीय पक्षी अपना बसेरा बना लेते हैं। अजोम में पानी कम होने से जलीय जीवों के जीवन पर संकट छा गया है। स्थानीय निवासियों ने आजोम में पानी की व्यवस्था कराने और सौंदर्यीकरण की मांग डीएम से की है।
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मान्यता है कि औंछा में 88 हजार ऋषियों की तपोस्थलीय है। यहां देवताओं के वैध देवकुमार ने च्यवनप्राश का निर्माण किया था। च्यवनप्राश को अजोम के पानी में ही घोला गया था। ऐतिहासिक स्थल होने के बाद भी जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते यहां कोई भी विकास कार्य नहीं हो सका।
पिछले लगभग एक सप्ताह से अजोम में हजारों स्थानीय पक्षी आए हुए हैं। इन पक्षियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है। अजोम में पानी भरने की कोई व्यवस्था न होने के चलते जल स्तर निरंतर कम हो रहा है। इससे जलीय जीवों के जीवन पर संकट छा गया है। स्थानीय निवासी राजू यादव, अशोक कुमार, विजेंद्र कुमार, कमल मिश्रा, पीलू, राकेश, लकी, निशांक यादव, छोटू, राहुल राजेश वर्मा ने डीएम से अजोम का सौंदर्यीकरण कराने और पानी भरवाने की की मांग की है।
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प्रधानमंत्री कार्यालय से मांगा था जवाब
अजोम कुंड में पिछले वर्ष हजारों की संख्या में मछली मर गई थी। इसे प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया था। प्रधानमंत्री कार्यालय से मछली मरने का कारण जाना गया था। वहां से आई चिकित्सकों की टीम ने जांच की थी। जांच में मछली मरने का कारण पानी कम होना बताया गया था।


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सबमर्सिबल खराब
स्थानीय निवासियों ने आर्थिक सहयोग देकर मंदिर परिसर में सबमर्सिबल लगवाई थी। यह सबमर्सिबल भी खराब हो गई।

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सबमर्सिबल लगवाने के साथ ही होगा सौंदर्याकरण: डीएम
डीएम वीके आनंद का कहना है कि एतिहासिक स्थलों की उपेक्षा नहीं होगी। अभी उन्हें जानकारी नहीं मिली है। वह इसकी जांच कराकर शीघ्र सबमर्सिबल लगवाने के साथ ही प्रस्ताव बनवाकर ऐतिहासिक स्थल का सौंदर्यीकरण भी कराएंगे।
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