मैनपुरी। जलनिगम और पालिका की लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। तीन साल पहले स्वीकृत पेयजल योजना पर अगर काम शुरू हुआ होता तो जिले को 2030 तक के लिए जल संकट से निजात मिल जाती। जलनिगम की हठधर्मिता से प्रस्ताव वापस हो गया। अब प्रस्ताव पर प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
शहरवासियों को पानी मुहैया कराने के लिए पालिका प्रशासन की ओर से तीन साल पहले जल निगम को शहर में दो पानी की टंकी और 14 नलकूप बनाने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन जमीन न मिलने के चलते ऐसा मामला फंसा कि न टंकी लग पाई और न ही नलकूप।
नगरपालिका परिषद प्रशासन का कहना है कि उसने आगरा रोड पर रामलीला मैदान और स्टेशन रोड पर पावर हाउस कालोनी में जगह बताई थी, लेकिन जल निगम ने शहर के बाहर जगह मांगी थी। पालिका ने बाहर की जमीन देने में असमर्थता जता दी। परिणाम यह हुआ कि पैसा वापस हो गया। अब पालिका ने फिर से शासन को दो बार इसका प्रस्ताव बनाकर भेजा, लेकिन अभी तक जवाब नहीं मिला। पालिका के अधिकारियों के अनुसार जमीन मिल गई होती तो इससे अगले 16 साल तक के लिए शहर को जल संकट से निजात मिल जाती।
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6600 हैं पानी के कनेक्शन
नगर पालिका प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो शहरी क्षेत्र में 6600 पानी के कनेक्शन हैं लेकिन 25 हजार से अधिक लोग पानी का उपयोग कर रहे हैं। पालिका ने इन पर वाटर टैक्स लगाया लेकिन यह लोग जमा नहीं कर रहे हैं। वहीं, पानी की आपूर्ति के लिए 12 टंकियां, 23 नलकूप और 1088 हैंडपंप हैं। इनमें से एक नलकूप खराब पड़ा है। साथ ही 50 हैंडपंप रीबोर के लिए हैं।
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35 लीटर प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत
पालिका का दावा है कि वह अपनी क्षमता के मुताबिक आपूर्ति कर रही है। प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 35 लीटर पानी की जरूरत है। इसकी सप्लाई की जा रही है। नगर के मोहल्ला महमूदनगर, राजीव गांधी नगर, गुलाब बाग, दरीबा, आश्रम रोड, नगला टाल, बंशीगौरा, पुरानी मैनपुरी, देवपुरा और देवी रोड आदि क्षेत्रों में हमेशा पानी की किल्लत बनी रहती है।
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टंकी और नलकूप बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव स्वीकृत होते ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
- साधना गुप्ता, चेयरमैन मैनपुरी