बेवर। नगर क ी एकमात्र क्रय विक्रय समिति प्रशासन की अनदेखी के चलते अव्यवस्थाओं की भेंट चढ़कर सालों से बंद पड़ी है। इससे जुड़े उपभोक्ताओं को शासन की सुविधाओं का लाभ मिलना असंभव है। समिति से जुड़े करोड़ों के संसाधनों को बेचा और खाया जा चुका है। वहीं प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी अनजान है।
सहकारी व्यवस्था के तहत नगर के फर्रुखाबाद रोड पर बस स्टैंड के पीछे सहकारी क्रय विक्रय समिति का गठन किया गया। यह तहसील स्तर की साधन सम्पन्न संस्था थी। नगर और ग्रामीण इलाके के लिए उपभोक्ता सामग्री का विक्रय होता था। इस संस्था ने किसानों के लिए एक कोल्ड स्टोर भी संचालित किया गया। यह भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इसी संस्था ने कपड़ा व्यवसाय, उर्वरक, गेहूं खरीद और राशन वितरण का काम किया। संस्था के सेल्स कर्मचारी के पास अस्थायी सचिव का चार्ज आ गया। इसके बाद गेहूं खरीद में की गई धांधली के चलते संस्था निलंबित कर दी गई। इसे सात साल गुजर गए हैं। गतिविधियां उसी दिन से बंद पड़ी हैं। समिति के पास बड़ी क्षमता के तीन गोदामों में से एक को खाद्य विभाग ने किराए पर ले लिया है। उससे प्राप्त आय से इस संस्था से संबद्ध कर्मचारियों को पेंशन मिल रही है। जबकि उपभोक्ता भटकते घूम रहे हैं। दो गोदाम और संस्था के भवन को निजी उपयोग मेें लाया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने संस्था के संचालन की मांग उठाई।