मथुरा। जिरौली गांव के लोगों को पेयजल के नाम पर जहर दिया जा रहा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये पानी गांवों भर में गंभीर बीमारियों का सबब बना हुआ है। खाद्य विभाग द्वारा कराई गई पेयजल जांच में ये तथ्य सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार ग्रामीणों को आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल मेें निर्धारित मानक से फ्लोराइड छह गुना, टीडीएस लगभग पांच गुना, हार्डनेस तीन गुना अधिक पाई गई। वहीं पानी में वैक्टिीरिया भी पॉजिटिव पाया गया। विशेषज्ञ इस पानी को पीने के योग्य नहीं बता रहे हैं। इस पानी से बच्चों की हड्डियां कमजोर होती हैं और अन्य बीमारियों के होने की भी प्रबल संभावना रहती है।
बीते दिनों गांव जिरौली के लोगों ने पल्स पोलियो अभियान के बहिष्कार का ऐलान किया था। उनका कहना था कि गांव में पोलियो रोधी दवा पिलाने के बाद भी बच्चों में विकलांगता की शिकायतें आ रही हैं।
इस मामले में खाद्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को आपूर्ति किए जा रहे पेयजल और दालों के नमूने लिए। जब उक्त पेयजल की जांच की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी सतीश शुक्ला ने बताया कि ग्रामीणों को आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल मेें फ्लोराइड की मात्रा 1120 पीपीएम आई है जो मानक से छह गुना अधिक है। इसके अलावा टीडीएस 2271 आया है जो कि पांच सौ होना चाहिए वहीं हार्डनेस भी 200 के मुकाबले 658 तथा वैक्टीरिया पॉजिटिव पाया गया है। विशेषज्ञ इस पानी को पीने के योग्य नहीं बता रहे हैं।
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स्वास्थ्य विभाग अनजान
गांव जिरौली में विकलांगता के मामलों के सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बेसुध है। पानी की रिपोर्ट आने के बाद जब फरह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डा. रविंद्र गुप्ता से इस बारे में पूछा गया तो वो पानी की सैंपलिंग और उसके परिणाम से अनभिज्ञता जताते रहे। इधर तहसील प्रभार देख रहे एसीएमओ डा. एसके जैन ने बताया कि पानी, तेल और दाल की सैंपलिंग उन्हीं की देखरेख में कराई गई थी। रिपोर्ट के बारे में अभी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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‘पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने से बच्चों की हड्डियां कमजोर होने की तथा टीडीएस अधिक होने से पथरी, डायरिया आदि की संभावनाएं बढ़ जाती है।
- डा. अजय शर्मा
पैथोलॉजिस्ट, मथुरा।
नल उगल रहे बदबूदार पानी
चौमुंहा। विकास खंड के गांव तरौली के ग्रामीण दूषित जल पीने को मजबूर हैं। पांच वर्ष से टंकी की सफाई न होने के कारण नलों में बदबूदार पानी आ रहा है। इसे पीना तो दूर अन्य दैनिक कामों में भी प्रयुक्त नहीं किया जा रहा है। ग्रामीण दूरदराज से पेयजल लाने को मजबूर हैं।
ग्रामीण मूलचंद ने बताया कि टंकी से आने वाले पानी से बदबू आती है। नंद किशोर गागा पहलवान ने कहा कि पानी की टंकी की सफाई पिछले पांच वर्ष से नहीं कराई गई है। जनार्दन सिंह ने बताया कि कभी-कभी तो पानी की आपूर्ति के दौरान पक्षियों के पंख तक आ जाते हैं। तरौली जनूबी की महिलाएँ जहां महाराणा पब्लिक स्कूल के निकट से पानी लेकर आती हैं। वहीं तरौली सुमाली की महिलाएं नौगांव की ओर से पानी लेकर आती हैं। प्रधान से कई बार शिकायत की गई है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने एसडीएम को पत्र लिखकर समस्या से निजात दिलाने की मांग की है। मांग करने वालों में भरत सिंह, सत्यवीर सिंह, श्रीकांत भारद्वाज, उमेश सिंह, गज्जो नेता, मूला मास्टर, दुर्गा प्रसाद, प्रवीन कुमार आदि शामिल हैं।