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सावन में हो रही महादेव की जयजयकार

Mathura Updated Sun, 28 Jul 2013 05:33 AM IST
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मथुरा। श्रीकृष्ण की नगरी में महादेव की जयजयकार हो रही है। सावन माह के श्रीगणेश के साथ ही भगवान भोले नाथ के दर्शन कर भक्त अराधना कर रहे हैं। कल सावन के पहले सोमवार को लेकर चारों महादेव के मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के चारों कोने पर भगवान शंकर के प्राचीन मंदिर हैं, जिनका विशेष महत्व है। पूरब में पिपलेश्वर, पश्चिम में भूतेश्वर, दक्षिण में रंगेश्वर महादेव और उत्तर में गोकर्णेश्वर महादेव का मंदिर है।
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भूतेश्वर महादेव
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के दक्षिण में भूतेश्वर महादेव का मंदिर है। मान्यता है कि यहां शिवलिंग नाग शासकों ने स्थापित किया था। मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी का माना जाता है। भूतेश्वर महादेव शहर कोतवाल के रूप में विख्यात हैं।

रंगेश्वर महादेव
शहर के पश्चिम क्षेत्र में रंगेश्वर महादेव जी विराजते हैं। होलीगेट के करीब स्थित महादेव के इस प्राचीन मंदिर का विशेष महत्व है। मान्यता है कि कंस ने श्रीकृष्ण और बलराम को मारने की साजिश करके इस स्थान पर रंगशाला बनवाई थी। अयाताकार आधार वाले इस मंदिर के मुख्यद्वार से सीढ़ियां नजर आती हैं। नीचे गर्भगृह में यहीं से प्रवेश होता है। दक्षिण दिशा में रंगभूमि मंडल स्थित है।
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पिपलेश्वर महादेव
पिपलेश्वर महादेव बंगाली घाट के निकट स्थित हैं। इस प्राचीन मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां के महादेव प्रेतों पर नियंत्रण रखते हैं। इस मंदिर के निकट ही यमुना जी कलकल बहती हैं।

गोकर्णेश्वर महादेव मंदिर
टीले पर बने गोकर्णेश्वर महादेव का मंदिर मसानी क्षेत्र में आकाशवाणी के पीछे स्थित है। शहर के उत्तर में यह मंदिर भगवान गोकर्णेश्वर को समर्पित किया गया था। शहर के उत्तर क्षेत्र में बसे लोगों के साथ ही सावन में यहां ग्रामीण अंचलों से भी श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। मान्यता है कि भगवान का गाय के कर्ण से प्राकट्य हुआ था। इसी लिए गोकर्णेश्वर महादेव कहा जाता है।
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