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अवार्ड वाली बिटिया है गीतांजलि

Mathura Updated Sat, 04 Jan 2014 05:41 AM IST
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मथुरा। विश्वलक्ष्मी नगर निवासी डा. पीआर शास्त्री के यहां पांच ‘लक्ष्मी’ हैं। दूसरे नंबर की गीतांजलि उनकी अवार्ड वाली बिटिया है। बात किसी भी मुद्दे पर शुरू हो उनकी ओर से अवार्ड वाली बिटिया का जिक्र जरूर होगा। बिटिया की प्रतिभा पर फूले नहीं समाते डा. शास्त्री।
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‘मेरी बिटिया अवार्ड लाती है’। पीआर शास्त्री गाहे-बगाहे इतनी बार ये वाक्य कहते हैं कि ये उनकी पहचान सा बनता जा रहा है। बात शुरू हुई तो गर्व से बोले कि गीतांजलि ने ब्रज की लोक परंपराओं को देश ही नहीं विदेश में भी अलग पहचान दिलाई है। राधा के चरित्र की भावपूर्ण प्रस्तुति उसकी पहचान बनती जा रही है। ये कहते हुए वह गीतांजलि को मिले अवार्ड गिनाने लगते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में नाजनीन ए ताज, मिस यूपी टैलेंटेड, वर्ष 2010 में नेशनल यूथ अवार्ड उसे मिल चुका है। दिल्ली साहित्य अकादमी की ओर से भी उसे सम्मानित किया गया है।
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बिटिया की बातें खत्म नहीं होती। बोले पूत के पांव पालने में ही दिख गए थे। गीतांजलि स्कूल से ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेती रही और ऐसा कभी नहीं हुआ कि अवार्ड न लाई हो। वो शुरू से ही लोक कलाओं के लिए समर्पित रही है। वर्तमान मेें वो देश के कोने-कोने में छुपी प्रतिभाओं को निखारने की मुहिम में लगी है।
डा. पीआर शास्त्री की पत्नी डा. निर्मला आचार्य का देहांत हो चुका है। बताते हैं घर बेटियां ही संभालती हैं। बड़ी बेटी पूर्णिमा का विवाह हो चुका है। गीतांजलि से छोटी श्रुति अभिनय के क्षेत्र में है। गायत्री संगीत से ग्रेजुएशन कर रही है। पन्वी भी ग्रेजुएशन कर रही है। दो भाई माधव और मोहित हैं।
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