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दो साल से नहीं हो रहा श्रमिक बच्चों का सर्वे

Mau Updated Sun, 06 Jan 2013 05:30 AM IST
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मऊ। ‘बच्चे ही राष्ट्र के भविष्य हैं। वे इस देश के भावी कर्णधार हैं। यह मंच पर बड़ी आसानी से कह दिया जाता है’। नगर सहित जिले के विभिन्न इलाकों में स्थापित चाय, होटल, कारखानों सहित अन्य प्रतिष्ठानों में नियम कानून को ताक पर रखकर पर बाल श्रमिकों से हाड़तोड़ मेहनत कराई जा रही है। जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत छह से 14 वर्ष से तक के बच्चाें को नि:शुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है। लेकिन बच्चे दुकानों पर काम करते देखे जा रहे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से श्रम विभाग से श्रमिक बच्चों की सूची मांगी गई, लेकिन सूची देना तो दूर विभाग की ओर से अभी श्रमिक बच्चों का सर्वे तक नहीं कराया जा सका है। जबकि जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आउट आफ स्कूल बच्चों के दर्जनों विशेष प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं।
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सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाने के बाद भी शासन की मंशा सफल होती नजर नहीं आ रही है। देश के निर्माता कहे जाने वाले बच्चे जूठे बर्तन साफ करने सहित अन्य काम करते देखे जा रहे हैं। बाल श्रम उन्मूलन के लिए केंद्र सरकार की ओर से बाकायदा कानून बनाया गया है। श्रमिक बच्चों का चिह्निकरण कर इन बच्चों को राष्ट्रीय बाल श्रम परियोजना के तहत खोले गए स्कूलों में भेजा जाना था, लेकिन कागज में ही बच्चों की पढ़ाई चल रही है। श्रम विभाग की ओर से दो वर्ष से बच्चों के चिह्निकरण करने का काम बंद है। वर्तमान शिक्षा सत्र का भी छह माह बीत गया। लेकिन चिन्हीकरण करने का काम अधर में है। अधिकारियों की मानें तो विभाग की ओर से सर्वे करने का जिम्मा डीसीएसके पीजी कालेज के एक प्रवक्ता को दिया गया है। गत वर्ष बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से श्रम विभाग से श्रमिक बच्चों की सूची मांगी गई थी, लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। जबकि जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आउट आफ स्कूल के 27 विशेष प्रशिक्षण केंद्र चलाए जा रहे हैं। इनमें बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जा रही है। श्रम विभाग श्रमिक बच्चों को शिक्षित करने में रुचि न लिया जाना प्रबुद्ध वर्ग के लोगों के समझ में नहीं आ रहा है। लोगों का कहना है कि विभागीय अधिकारी ठेकेेदारों, कारखानों व अन्य प्रतिष्ठानों के संचालकों से भारी भरकम सुविधा शुल्क वसूलने के चलते कागज में ही छापेमारी कर दी जाती है। बावजूद प्रशासन की तंद्रा टूटने का नाम नहीं ले रही है।


प्रभारी सहायक श्रमायुक्त डीजे सिंह का कहना है कि श्रमिक बच्चों के सर्वे का काम शीघ्र ही पूरा कर लिया जाएगा।
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