घोसी। कस्बा के माछिल जमीन माछिल में माता जगपुरनी देवी की प्रथम परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर ‘सामाजिक आंदोलन में महिलाओं की भूमिका’ विषयक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। इस दौरान महिलाओं को अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता बताई गई।
इस मौके पर मृदुला आनंद ने कहा कि भारत के अंदर शास्त्रों पर विचार कर महिलाओं को पूरी तरह पंगु बना दिया गया है। वेद की रचना के समय ही महिलाओं के अधिकार का हनन कर दिया गया था। महिलाओं को शिक्षा समानता का अधिकार देने में कोताही की गई। आज के बदलते परिवेश में महिलाओं को देवी नहीं कम से कम इंसान का दर्जा मिलना चाहिए। कहा कि देश में दलित महिलाओं की अभी भी स्थिति चिंताजनक है। महिलाओं की पूर्ण आजादी के लिए महिला सम्मेलन को और सक्रिय करने की जरूरत है। महिलाएं जब तक आगे नहीं आएंगी संघर्ष नहीं करेंगी तब तक वे समाज की मुख्य धारा से नहीं जुड़ पाएगी। इतिहास विद एसएनआर रिजवी ने कहा कि महिलाओं को अपनी आंतरिक शक्ति को जागृत करने की जरूरत है। अपने हक के लिए स्वयं आगे आएं। कार्यक्रम को शिवचंद राम, अरविंद मूर्ति, डा. बीआर बुद्धप्रिय, पीडी टंडन , श्रवण कुमार,रामअवध राव आदि ने संबोधित किया। संचालन डा. रामविलास भारती ने किया।