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गंगाजल से दूर होगा खाकी का दबाव

Meerut Updated Thu, 09 May 2013 05:30 AM IST
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मेरठ। जिले में पुलिसकर्मियाें में दबाव को दूर करने के लिए डीजीपी और एडीजी के निर्देश पर बुधवार रात को पुलिस लाइन में गंगाजल फिल्म दिखाई गई। फिल्म में जिस तरह से नायक बड़े राजनेताओं के खिलाफ बेधड़क कार्रवाई करता है, कुछ उसी तरह से जिले के पुलिस अधिकारियों से कार्रवाई की उम्मीद की गई। वहीं साथ ही एसएसपी ने यह भी कहा कि पुलिस लोगों के साथ बेहतर ढंग से व्यवहार करे। हमेशा घटनाओं पर देर से पहुंचने वाले पुलिसकर्मी फिल्म देखने भी समय से नहीं पहुंचे। फिल्म को साढ़े सात बजे आरंभ होना था लेकिन, ज्यादातर थानेदार और सीओ देर से ही पहुंचे। इस पर एसएसपी ने सभी को खूब डांट पिलाई। उन्होंने आरआई को बुलाकर कई के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। हालांकि गंगाजल जैसी फिल्म को दिखाया जाना भी काफी चर्चा का विषय रहा। गंगाजल में जिस तरह से तेजाब कांड दिखाया गया, उससे पुलिस की भूमिका पर काफी सवाल उठे थे। पुलिस लाइन में फिल्म आरंभ होने से पहले एसएसपी दीपक कुमार ने पुलिसकर्मियों को संबोधित किया कि आमजन के बीच पुलिस का खौफ नहीं बल्कि बेहतर चेहरा होना चाहिए।
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दिया गया उदाहरण
फिल्म में नायक अजय देवगन पुलिस अधीक्षक बनकर खाकी की हकीकत जानने को जिले के दौरे पर निकलते हैं तो उनकी कार खराब हो जाती है। ड्राइवर किसी तरह कार को पास के थाने में ले जाता है। कप्तान जैसे ही थाने में अंदर घुसते हैं तो दरोगा कमर पर मालिश कराता मिलता है। थाने की पुलिस का आलम यह होता है कि जीप पेट्रोल पंप से दलाली वाले डीजल से चलती है। बाद में कप्तान बस में बैठकर निकलते हैं तो रास्ते में चौकी के पुलिस कर्मी यात्रियों से वसूली करते हैं। एक यात्री के रूप में बैठे कप्तान चेकिंग का कारण पूछते हैं तो सिपाही उन्हें धमका देते हैं। चौकी इंचार्ज भी कप्तान को देखने की धमकी देकर सिपाहियों से गिरफ्तार करने की बात कहता है। उसी वक्त वहां कप्तान की गाड़ी पहुंचने पर पुलिसकर्मी पैरों में पड़ने लगते हैं। फिल्म में बताया कि पुलिस को डराना नहीं चाहिए। समस्या का निराकरण, ईमानदारी और निष्पक्षता से करना चाहिए।
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