मेरठ। बिना स्वास्थ्य केंद्र पर आए मोटा वेतन पाने वाले एमबीबीएस डॉक्टरों पर अब स्वास्थ्य विभाग लगाम कसने की तैयारी में है। एडी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा. डीके कनौजिया ने मेरठ मंडल के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को समीक्षा बैठक में आयुष डॉक्टरों की डेली डायरी और ओपीडी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए स्वास्थ्य मंत्री ने नई व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत एमबीबीएस के डॉक्टरों की सैलरी उनकी ओपीडी रिपोर्ट के आधार पर जारी की जानी थी लेकिन इस व्यवस्था का तोड़ भी निकाल लिया गया। एमबीबीएस डॉक्टरों ने स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात आयुष डॉक्टरों द्वारा देखे गए मरीजों को अपनी ओपीडी रजिस्टर में दर्ज कराना शुरू कर दिया। उल्लेखनीय है कि स्वास्थ्य विभाग में अधिकांश आयुष डॉक्टर एक साल के लिए संविदा पर रखे जाते हैं। संविदा विस्तार के लिए सीएमओ कार्यालय एमबीबीएस डॉक्टर से रिपोर्ट मांगता है।
सेवा विस्तार पाने के लिए देते है मरीज
एक आयुष डॉक्टर दिनभर में 150 से 200 मरीजों को देखता है। इस दौरान आयुष डॉक्टर 50-70 मरीजों को अपने खाते में दर्ज करता है, शेष एमबीबीएस डॉक्टरों के खाते में लिख दिए जाते हैं। ऐसे में एमबीबीएस डॉक्टरों का कोटा पूरा हो जाता है। अमर उजाला द्वारा खबर ब्रेक किए जाने के बाद अब एडी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण ने अलग से समीक्षा करने की व्यवस्था लागू की है।
वर्जन
सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में आयुष के डॉक्टरों की ओपीडी की अलग से समीक्षा की जाएगी। इसलिए उन सभी की रिपोर्ट अलग से बनाई जाए।
- डा. डीके कनौजिया, एडी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण