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बहनजी ने दिया मुनकाद को झटका

Meerut Updated Wed, 21 May 2014 05:30 AM IST
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मेरठ। लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता नहीं खुलने से नाराज बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने विश्वासपात्रों को ही झटका दे दिया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सदस्य बाबू मुनकाद अली उनके सबसे विश्वस्त माने जाते थे। इस बार वह भी बहनजी के कोप से नहीं बच पाए। मुनकाद अली को यूपी से हटाकर दिल्ली भेज दिया। अब उनकी जगह कौन लेगा, इसकी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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बाबू मुनकाद अली का बसपा में बड़ा कद है। वर्ष 2007 में बसपा की सरकार बनने पर मायावती ने उन्हें उपकृत कर राज्यसभा पहुंचाया था। यही नहीं इसके बाद वह बसपा सुप्रीमो के करीबियों में गिने जाने लगे थे। यही कारण रहा कि वह लगातार दूसरी बार राज्यसभा पहुंचे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभार उन पर रहा। इस बार के लोकसभा चुनाव परिणाम ने सारा भरोसा चकनाचूर कर दिया। इससे नाराज मायावती के कोप से मुनकाद अली भी नहंीं बच पाए। उन्हें यूपी से हटाकर दिल्ली की जिम्मेदारी दे दी। उनके साथ नसीमुद्दीन, दयाचरण दिनकर, पूर्व सांसद बलीराम और गोरेलाल जाटव को भी दिल्ली का रास्ता दिखा दिया।
यदि देखा जाए तो बाबू मुनकाद अली को लेकर पार्टी में खींचतान रही है। वह मायावती का विश्वासपात्र होने के कारण ही अपने पद पर टिके थे। बसपा का मूल वोट बैंक दलित ही उनके विरोध में कई बार आवाज उठा चुका था। विधानसभा चुनाव में तो उनका जमकर विरोध हुआ था। कई नेताओं के साथ बड़ी संख्या में कार्यकर्ता बसपा छोड़कर चले गए थे। इसके लिए मुनकाद अली को ही जिम्मेदार माना जा रहा था। उस समय भी मायावती ने मुनकाद अली पर भरोसा कायम रखा था।
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अब किसके हाथ होगी पश्चिम की कमान
बसपा में अब पश्चिम की कमान किसके हाथ में होगी इस पर मायावती ने अभी फैसला नहीं किया है। हालांकि चर्चा है कि इस बार किसी दलित या पिछड़ा वर्ग के नेता को कमान सौंपी जा सकती है। वहीं मंडल कोर्डिनेटर और जिलाध्यक्ष को लेकर भी जोड़तोड़ की चर्चा शुरू हो गई है।
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