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कचहरी शूट आउट का बदला डबल मर्डर

Meerut Updated Mon, 08 Sep 2014 05:31 AM IST
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मेरठ। शुक्रवार को कचहरी में नितिन उर्फ गंजा की हत्या। नितिन ऊधम गैंग का शूटर था। हत्यारों की तलाश में पुलिस खाक छान रही है। अब रविवार को रतौली गांव में योगेश भदौड़ा के मौसेरे भाई सुदेश पाल और शैलेंद्र की हत्या कर दी गई। माना जा रहा है कि कचहरी शूट आउट का बदला इस वारदात को अंजाम देकर लिया गया।
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इससे एक बार फिर योगेश भदौड़ा और ऊधम गैंग में खूनी जंग भड़क गई है। वहीं, रतौली गांव में पार्टीबंदी है। इसकी वजह से भी गैंगवार को बढ़ावा मिल रहा है। गौरतलब है कि, दो दिन पूर्व जब कचहरी नितिन उर्फ गंजा निवासी वाजिदपुर (बागपत) की हत्या हुई, तभी संकेत मिल गए थे कि दोनों गैंगों के बीच खून-खराबा बढ़ेगा। वर्तमान प्रधान प्रमोद और योगेश भदौड़ा मौसेरे भाई हैं। मृतक सुदेशपाल वर्तमान प्रधान प्रमोद का चचेरा भाई है। प्रमोद पक्ष के लोगों की गांव में प्रीतम पक्ष के लोगों से रंजिश चल रही है। ऐसा भी हो सकता है कि उसी रंजिश में सुदेशपाल की हत्या हुई हो। लेकिन प्रारंभिक जांच में गैंगवार को ही हत्या की वजह माना जा रहा है। हालांकि, ग्रामीण अभी खुलकर कुछ कहने को तैयार नहीं हैं।
पुलिस भांप नहीं पाई संकेत:
ऊधम और योगेश भदौड़ा के बीच चल रही गैंगवार किसी से छिपी नहीं है। कचहरी में हत्या के बाद इसके खुलकर सामने आने की बात उड़ गई थी, मगर पुलिस इससे अनजान बनी रही। अब तक न तो नितिन हत्याकांड के आरोपी पकड़े गए और न ही दोनों बदमाशों के गैंग में शामिल बदमाशों की धरपकड़ हुई। ये हाल तो तब है, जबकि पुलिस के पास योगेश और ऊधम दोनों ही बदमाशों के गैंग चार्ट में शामिल बदमाशों के नाम भी हैं। ऐसे में सवाल उठते हैं कि क्या गैंगचार्ट में बदमाशों के नाम सिर्फ खानापूर्ति के लिए चढ़ा दिए जाते हैं या जानबूझकर पुलिस इन पर शिकंजा कसना नहीं चाहती।
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रतौली में होता रहा है खून-खराबा:
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्ष-2002 में रतौली निवासी सरदार सिंह पुत्र गिरवर सिंह की हत्या हुई। उसके कुछ दिन बाद बबलू पुत्र सुखवीर की हत्या हुई। इन दोनों हत्याकांड में प्रमोद कुमार (वर्तमान प्रधान) ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। इस केस में प्रमोद पक्ष ने पैरवी की। इसके बाद वर्ष-2002 में ही दूसरे पक्ष के धर्मपाल पुत्र प्रीतम की हत्या हुई, जिसमें योगेश भदौड़ा, राजेंद्र उर्फ भूरा, लीलू पुत्र नाहर सिंह, राजीव पुत्र बीर सिंह और अनुज पुत्र सुदेशपाल को नामजद किया गया। तभी से दोनों पक्षों में रंजिश चल रही है। एक तरफ जहां प्रमोद पक्ष योगेश भदौड़ा के परिवार से जुड़ा है, वहीं विपक्षी दूसरे गैंग से।
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शैलेंद्र के सिर, सुदेशपाल के पेट में मारी गोली:
हत्यारों ने शैलेंद्र के सिर में गोली मारी, जिससे उसकी खोपड़ी उड़ गई। सिर्फ गर्दन ही बची। वहीं, सुदेशपाल को पेट में सटाकर गोली मारी गई। परिजनों ने बताया कि सुदेशपाल घर से साइकिल लेकर गया था। उसकी साइकिल ट्यूबवेल से काफी दूर गांव के बाहरी छोर पर मिली। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि सुदेशपाल को सड़क से ही पकड़कर ट्यूबवेल तक ले जाया गया। पुलिस ने सुदेशपाल के छोटे भाई श्रीपाल और शैलेंद्र के पिता रामवीर से रंजिश के बारे में जानकारी की। प्रारंभिक जांच में इन दोनों की हत्या रंजिशन ही मानी जा रही है।
15 दिन पूर्व बेटे की मौत:
ग्रामीणों ने बताया कि 15 दिन पूर्व ही सुरेशपाल के बेटे मनोज की सड़क हादसे में मौत हुई थी। हादसा नानू गांव के पास हुआ। अभी मनोज की मौत के सदमे से परिवार के लोग उबरे भी नहीं थे कि सुदेशपाल की हत्या हो गई।
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