सूरज की तपिश के बीच नगर निगम प्रशासन की अनदेखी के कारण जनता के सामने पानी का संकट खड़ा हो गया है। शहर के करीब 10 हजार में से दो हजार से ज्यादा हैंडपंपों का गला सूख गया है। इनमें से कई ऐसे हैं, जिनके रीबोर के बाद भी पानी उगलने की संभावना बहुत कम है। वहीं, मनमर्जी की बिजली कटौती से निगम की ट्यूबवेल भी शहर की जरूरत पूरी करने में नाकाम साबित हो रही हैं। इन हालात में गंगाजल परियोजना ही शहर की जनता को राहत दे सकती है।
गंगाजल परियोजना को लेकर निगम प्रशासन की उदासीनता के बीच इस गर्मी भी शहरवासियों को जल संकट से दो-चार होना पड़ रहा है। वजह यह कि हैंडपंपों के धोखा देने के साथ बिजली भी मनमानी पर उतारू है। निगम की अदूरदर्शिता के चलते हर गर्मी शहर के सामने यह संकट खड़ा होता है। लेकिन, निगम अफसर हैं कि उनकी आंखें ऐन वक्त पर ही खुलती हैं। निगम ने अब महज 900 हैंडपंपों के रीबोर के लिये टेंडर किया है। लेकिन, खराब पड़े दो हजार से ज्यादा हैंडपंपों में से कई ऐसे हैं, जो पिछले आठ माह से ज्यादा समय से खराब पड़े हैं। दबी जुबान यह बात अधिकारी भी मान चुके हैं कि लंबे समय से खराब नलों से रीबोर के बाद भी पानी आने की संभावना कम है।
आउटर में है बड़ी मुसीबत
शहर के आउटर में स्थित कॉलोनियों के लोग ज्यादा परेशान हैं। वजह यह कि वहां पानी की पाइप लाइन और ट्यूबवेल भी नहीं है। ऐसे में वे हैंडपंप के भरोसे ही हैं।
बोर्ड बैठकों में भी उठा मुद्दा
निगम की बोर्ड बैठकों में भी जल संकट का मुद्दा कई बार उठ चुका है। पार्षद खराब हैंडपंपों को ठीक कराने की मांग भी कर चुके हैं। लेकिन, अफसरों के आश्वासन के बाद भी हालात जस के तस हैं।
गंगाजल ही ‘उपचार’
शहर में जलापूर्ति अब गंगाजल परियोजना के भरोसे है। गंगाजल सप्लाई होेने पर पानी का प्रेशर ठीक रहता है। लेकिन, गंगाजल के साथ रेत आने से शहर की इस उम्मीद को भी ग्रहण लगा हुआ है।
इन्हें नहीं लगती परेशानी
निगम के महाप्रबंधक जल संजीव रामचंद्र का कहना है कि शहर में वाटर सप्लाई की खास परेशानी नहीं है, जो हैंडपंप खराब हैं, उन्हें ठीक करने का काम चल रहा है। हैंडपंपों के रीबोर के लिये टेंडर हो चुका है। जल निगम ने गंगाजल सप्लाई की भी तैयारी कर ली है, जो जल्द ही शुरू हो जाएगी।