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यहां भी हो सकता है मुजफ्फरनगर जैसा रेल हादसा

Updated Sun, 20 Aug 2017 07:43 PM IST
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प्रतापगढ़ । लगातार हो रहे रेल हादसों के बाद भी प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन के अधिकारी व कर्मचारी सबक नहीं ले रहे हैं। उनकी लापरवाही के चलते यहां कभी भी मुजफ्फरनगर जैसा रेल हादसा हो सकता है। रेलवे स्टेशन और यार्ड में पटरियों को सुरक्षित रखने वाले नट-बोल्ट, पिनडाल्फ क्लिप, पैड गायब हैं। जगह-जगह स्लीपर टूटे हैं। रूट बदलने वाली क्रॉसिंगों के अधिकांश पेच ढीले हैं। पटरियां बदलने वाली रॉड तो वर्षों पुरानी है। मोटा रॉड टूटने के कगार पर पहुंच गया है। इसके बावजूद अफसरोें से लेकर कर्मचारियों तक की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। यह लापरवाही किसी भी दिन यात्रियों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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मुजफ्फरनगर के खतौली के निकट उत्कल एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने की वजह टूटे ट्रैक पर तेज रफ्तार में ट्रेन का संचालन बताया जा रहा है। प्रतापगढ़ में भी जर्जर हो चुकी रेल पटरियों पर ट्रेनों को दौड़ाया जा रहा है। रेलवे लाइन जवाब दे चुकी है। जर्जर हो चुकी पटरियों को आपस में जोड़ने वाली नटबोल्ट, पिनडाल्फ क्लिप तक गायब हैं। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर स्थित डाकघर और जीआरपी के सामने और सुर्खी साइडिंग की डायमंड क्रासिंगों पर भी खतरा मंडरा रहा है। यहां पर अक्सर प्वाइंट फंस जाता है। जिससे हादसा कभी भी हो सकता है। स्लीपर टूटकर बिखर चुके हैं। इनको बदलने की जरूरत नहीं समझी जा रही है। प्वाइंट को लाठी और रॉड से ठोक-पीटकर ठीक किया जाता है।

प्रतापगढ़ के तीनों प्लेटफार्म पर पटरियों के जोड़ भी खुले हुए हैं। जीआरपी थाने के सामने, डाकघर के सामने, लोको के सामने, पटरियों को देखकर इसका अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी भी दिन मुजफ्फरनगर जैसा हादसा बेल्हा में भी हो सकता है। जबकि रेलवे स्टेशन के उत्तर और दक्षिण छोर से दो-दो किमी तक देखा जाए तो जगह-जगह नट बोल्ट और पिनड्रॉप क्लिप गायब हैं। रेलवे के अफसरों का ध्यान इस ओर नहीं पड़ता है। पहले अफसर ट्राली से ट्रैक निरीक्षण करने के लिए निकलते थे। मगर अब वे आफिस से बाहर ही नहीं निकलते। प्लेटफार्म बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही टंग लाइनों की हालत बदतर है। उनकी टंग जगह-जगह से टूट गई है। जिससे सिग्नल के समय अक्सर दोनों पटरियों के बीच गैप रह जाता है। यह गैप खतरनाक साबित हो सकता है। प्रतापगढ़ में बीते साल इंजन के पटरियों से उतरने के जो दो हादसे हुए उसमें इसकी तरह की खामियां उभर कर सामने आई हैं। उसके बाद भी अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एडीईएन का कहना है कि जहां खामियां है उसे दुरुस्त किया जा रहा है। सेक्शन के सभी पीडब्ल्यूआई और कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र के रेलवे ट्रैक, स्लीपर दुरुस्त रखें। जो समान गायब हो जाएं उसकी रिपोर्ट थाने में दर्ज कराएं। समान कम पड़ रहा हो तो तत्काल इसकी जानकारी दें। अगर कहीं भी शिकायत मिली कि रेलवे ट्रैक, स्लीपर में खामियां हैं तो संबंधित पीडब्ल्यूआई के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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