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लोगों का आक्रोश देख बैकफुट पर आया प्रशासन

अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़ Updated Fri, 22 Jul 2016 12:33 AM IST
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मोहन हाथी को सालभर पहले प्रशासन ने कब्जे में लेने का प्रयास किया था, लेकिन मामला आस्था से जुड़ा होने पर जनाक्रोश के चलते प्रशासन बैकफुट पर आ गया। बुधवार को जब कब्जे में लेने की कोशिश प्रारंभ हुई तो रात में ही अधिवक्ता ज्ञानप्रकाश शुक्ल, राववीरेंद्र सिंह, अनिल त्रिपाठी की अगुवाई में ग्रामीणों ने मोहन को ले जाने का विरोध शुरू कर दिया। हंगामा होने लगा तो पुलिस ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए इसका अनुपालन करने की बात ग्रामीणों की बताई। कानूनी अड़चन देख अधिवक्ताओं ने कोर्ट में लड़ाई लड़कर हाथी को लालगंज वापस लाने का फैसला किया। तब जाकर प्रशासन हाथी को कब्जे में लेने की कार्रवाई शुरू कर सका। तीन दशकाें से इलाके में रह रहा मोहन हाथी लोगों की आस्था से जुड़ा था। जहां भी वह जाता था लोग कुछ न कुछ खाने पीने को जरूर देते थे। यही कारण था कि जब ट्रक पर लादकर मोहन को ले जाया जा रहा था तो लोगाें की आंखें नम हो गई थीं। कोर्ट का आदेश नहीं होता तो आज भी लोग आसानी से मोहन को जाने नहीं देते। महावत वारिश गुलाम के आंसू तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे।
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चार साल पहले मोहन के तांडव से कांप गए थे लोग
चार साल पहले जुलाई माह में मोहन हाथी भयंकर गर्मी के चलते बेकाबू हो गया था। उसने लालगंज कस्बा समेत अन्य गांवों में इस कदर तांडव मचाया था कि लोग आज भी उसको याद कर कांप उठते हैं। उस समय मदमस्त हुए मोहन ने लालगंज कस्बे की दर्जनों दुकानों का जमींदोज कर दिया था। कई वाहन तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिए और बिजली के खंभों को तिनके की तरह उखाड़ फेंका। पूरेतिलक राम, मिश्राइनपुर, भवराम बोझी, धधुआ गाजन, सलेम भदारी, पूरे वंशी में भी मोहन ने जमकर तांडव मचाया था। लोगों की ट्रैक्टर ट्राली, हैंडपंप, पंपिंग सेट व दर्जनों बाइक मदमस्त हाथी के कोपभाजन का शिकार हो गए। मोहन के मदमस्त होने के दौरान सप्ताह भर ग्रामीणों जागकर रात बिताई थी। उसे काबू में करने के लिए जंगल विभाग की टीम, पुलिस महकमा व मथुरा से वन विभाग की विशेषज्ञ टीमें भी बुलाई गई थीं, लेकिन हाथी को काबू में करने के लिए किसी की एक नहीं चली थी। जिस महावत के इशारे पर मोहन कुछ भी करता था, मदमस्त होने पर उसने उसकी भी एक नहीं सुनी। सप्ताह भर तालाबाें व खेताें में खदेड़ कर रखने के बाद जब मदमस्त हाथी ठीक हो गया तब लोगों ने राहत की सांस ली थी। इस घटना के बाद से मोहन हाथी इलाके में जाना पहचाना नाम हो गया।

शहर के लोगाें पर टूट सकता है मोहन का गुस्सा
मोहन जब बच्चा था तब से लालगंज में ही रहने के दौरान उसकी देखभाल के लिए वारिश गुलाम को महावत रखा गया था। गुलाम ही एक ऐसा शख्स था जिसकी हर बात यह हाथी मानता था। उसके इशारे पर मोहन बुधवार को बेड़ियाें में जकड़े होने के बाद भी शांत होकर ट्रक पर जाने का तैयार हो गया। ट्रक पर लादने के दौरान मोहन को गुस्सा भी आया, लेकिन महावत की डांट पर चुपचाप चढ़ गया। जिला प्रशासन उसे लेकर चिलबिला गया तो जरूर है, लेकिन उसे संभाल पाना उसके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। अनजान जगह और अपरिचित लोगाें के देख उसका गुस्सा भड़क गया तो शहरियों को भारी पड़ सकता है। चिलबिला के रहने वालों की जान तो किसी भी समय जोखिम में पड़ सकती है।
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