रायबरेली। वीआईपी जिले में सीमित संसाधन प्रतिभाओं की राह में बाधक बनते जा रहे हैं। यहां पर एथलेटिक्स में सुधा सिंह से लेकर क्रिकेट में आरपी सिंह तक ने जलवा बिखेरा, लेकिन इसके बावजूद सुविधाओं में कोई इजाफा नहीं हुआ। शहर में बने एक मात्र मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में संसाधनों का अभाव है। वहीं कोच के नाम पर महज दो लोगों की तैनाती है। जुलाई का महीना चल रहा है, लेकिन अभी तक तरणताल में पानी नहीं भरा गया है। खेल निदेशालय की ओर से शहर में मोतीलाल नेहरू स्टेडियम है। यहां पर सुविधाएं बढ़ाने के बजाए कटौती होती जा रही है। निदेशालय की ओर से हॉकी कोच के रूप में संतोष कुमार तैनात हैं। इसके अलावा संविदा पर एथलेटिक्स कोच अनिल सिंह हैं। इसके अलावा बैडमिंटन, फुटबाल, क्रिकेट, टीटी, ताइक्वांडो, जूडो, कुश्ती आदि खेल के कोच की तैनाती नहीं की गई है। सीमित सुविधाओं के बीच जिले के लाडलों ने प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इसके बावजूद सुविधाओं की कमी आगे की राह में बाधा बनी हुई है। हालात यह हैं कि एथलीट सुधा सिंह भी जब आती हैं तो प्रैक्टिस के लिए उन्हें सड़क पर ही दौड़ना पड़ता है। उन्होंने अपना यह दर्द कई बार बयां किया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की भी कुछ ऐसी ही दशा है। प्रैक्टिस के अभाव में उनकी प्रतिभा में निखार नहीं आ पा रहा है।
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सुधा भी नहीं दिला सकीं स्टेडियम को संजीवनी
आईटीआई कॉलोनी स्थित राजीव गांधी स्टेडियम वर्षों से उपेक्षित है। एथलीट सुधा सिंह स्टेडियम की दशा को सुधरवाने के लिए सांसद सोनिया गांधी तक से मिलीं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कई बार उन्होंने प्रैक्टिस के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की बात कही। इसके बावजूद प्रदेश सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। आज भी स्टेडियम में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है।
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बदहाल बने मिनी स्टेडियम
पायका योजना के तहत जिले के तीन ब्लॉकों में मिनी स्टेडियम बनाए गए हैं। इसमें सलेथू महराजगंज, सलोन, बछरावां, निहस्था खीरों शामिल है। बछरावां कस्बे में बने स्टेडियम में देखरेख के अभाव में पानी भरा रहता है। यहां पर खिलाड़ी कभी-कभार ही नजर आते हैं। प्रशिक्षक के रूप में क्रीड़ा श्री की तैनाती की गई है। इसके अलावा करीब 150 ग्राम सभाओं में खेल मैदान बनाए गए हैं, लेकिन हकीकत से ज्यादा यह कागजों पर ही सक्रिय हैं। तैनात क्रीड़ा श्री भी शायद ही कभी स्टेडियम में नजर आते हैं।
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तैराकों को मुंह चिढ़ा रहा तरणताल
मोतीलाल नेहरू स्टेडियम में बना तरणताल सूखा पड़ा है। विभागीय अफसरों की मानें तो पानी भरने के लिए लगा मोटर खराब हो गया है। सूचना खेल निदेशालय को भेज दी गई है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। गर्मी में तैराकी प्रैक्टिस करने वाले खिलाड़ी अब दूसरे खेलों में रुचि लेने लगे हैं। यही वजह है कि प्रतिभाएं आगे नहीं आ पा रही हैं।
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जिले में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। सरकार की ओर से मिल रहीं सुविधाओं का लाभ खिलाड़ियों को दिलाया जा रहा है। कोच की कमी से प्रतिभाओं को आगे बढ़ने में परेशानी होती है। इस संबंध में विभाग को कई बार पत्र लिखा गया है।
संतोष कुमार, प्रभारी जिला क्रीड़ा अधिकारी