उन्नाव। शासन द्वारा स्कूलों में बच्चों के साथ मारपीट न किए जाने के आदेश के बावजूद इस पर रोक नहीं लग पाई है। ऐसे ही एक मामले में एक कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की एक वार्डन पर छात्रा को इतना पीटने का आरोप है कि उसके कान का पर्दा ही फट गया। पीड़िता का इलाज कराना तो दूर उसे पिता से मिलने भी न देने का आरोप है। पिता ने उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया है।
बिछिया विकास खंड के शिवनगर में कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय है। यहां गांव के ही कुुंवरचद की 14 वर्षीय बेटी ममता रहकर पढ़ रही है। कुंवरचंद का आरोप है कि वह 16 सितंबर को बेटी से मिलने विद्यालय गया था। काफी देर बाद बेटी को उससे मिलने दिया गया। बेटी का बायां गाल सूजा था और उसे बोलने में दिक्कत हो रही थी। पूछने पर उसने इशारों में बताया कि 15 सितंबर को वार्डन ने उसे बुरी तरह से पीटा था जिससे उसके बाएं कान से खून बहने लगा और वह बेहोश हो गई थी। आरोप है कि वार्डन ने इसकी सूचना उसे नहीं दी बल्कि जब वह मलने पहुंचा तो बेटी को उससे कुछ न बताने के लिए धमकाया भी। बताया कि बेटी की खराब हालत देख कर वह उसे घर लाया और बिछिया स्थित स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया। यहां चिकित्सकों ने कान का पर्दा फटने की बात बताते हुए ममता को जिला अस्पताल रिफर कर दिया। कुंवरचंद का आरोप है कि पहले भी वार्डन कई बालिकाओं को बुरी तरह पीट चुकी हैं। मद्दूखेड़ा की एक बालिका वार्डन के डर से रात में विद्यालय छोड़कर घर भाग गई थी। उसने करीब आधा दर्जन छात्राओं के नाम भी बताए जो कि दहशत के कारण घर भाग गईं। बाद मे इनके नाम काट दिए गए। यह भी आरोप लगाया कि बच्चियों के बीमार पड़ने पर वार्डन इलाज नहीं कराती हैं। इसके अलावा वार्डन पर गंभीर आरोप भी कुंवरचंद और अन्य अभिभावकों ने लगाए हैं।
विद्यालय के जिला समन्वयक अनुपम दीक्षित ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वह शनिवार को स्वयं संबंधित विद्यालय जाएंगे। यदि आरोप सही हैं तो वार्डन को कारण बताओ नोटिस जारी की जाएगी। यदि वार्डन के जवाब सही नहीं पाए गए तो उनकी सेवा समाप्ति की संस्तुति की जाएगी। बीएसए डा. मुकेश कुमार सिंह ने अपना सीयूजी फोन नहीं उठाया।