लोहता। कोटवां के खरका में बुधवार को रहस्यमय बुखार से दो लोगों की मौत हो गई थी। इन दो मौतों के गम में गांव वाले डूबे ही थे कि बुधवार को ही आधी रात के बाद मुख्तार (30) और आठ दिन की बेबी की मौत हो गई। गांव में अब भी दो दर्जन लोग इस रहस्यमय बुखार की चपेट में हैं। अब तक चार मौतों से लोग दहशत में हैं और पलायन की तैयारी कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इस बुखार में गर्दन अकड़ जा रही है और उल्टी के बाद पीडि़त की मौत हो जा रही है। एक के बाद एक चार मौतों की सूचना पर गुरुवार की सुबह स्वास्थ्य विभाग की आठ टीमें गांव पहुंची। ग्रामीणों को बुखार की दवा देने के बाद ब्लड का सैंपल जांच के लिए लिया गया। बता दें कि खरका में ही दस दिन पहले मेहंदी हसन (13) की मौत भी बुखार से हो गई थी। उसके पिता निजामुद्दीन का कहना है कि हसन को शाम को बुखार आया। सुबह उल्टी हुई और उसकी मौत हो गई। फिलहाल गंभीर रूप से बीमार सानिया (07) और शबनम (16) को चिकित्सकों ने कबीरचौरा अस्पताल में भरती कराया गया है।
गौरतलब है कि बुधवार को खरका के ही यासीन नाटे के लड़के छोटक (10) और जावेद (15) की बुखार से मौत हो गई थी। पीडि़त परिवार के लोगों ने बताया कि उन्हें दो दिन तक तेज बुखार रहा। फिर अचानक गर्दन में अकड़न हुई और उल्टी होने लगी। इसके एक घंटे बाद मौत हो गई। पहले दिन तो ब्लाक के डाक्टरों ने मस्तिष्क ज्वर की आशंका जताई थी। दूसरे दिन इस बीमारी के बारे में डाक्टर कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।
काशी विद्यापीठ के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. ओपी शुक्ला ने बताया कि आठ मेडिकल टीमें गांव में भेजी गई हैं। लोगों के खून के नमूने लिए जा रहे हैं। बुखार से पीडि़त लोगों को दवा भी दी जा रही है। डा. शुक्ला बुधवार को मरे जावेद और छोटक की मौत का कारण फूड प्वाइजनिंग, आठ दिन की बेबी की मौत का कारण संक्रमण और मुख्तार की मौत का कारण रोजा के दौरान शरीर में ग्लूकोज की कमी होना बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि मौत का सही कारण पीएम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
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अबूझ बुखार से कोटवां में हुई तीन बच्चों और एक युवक की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सीएमओ को पत्र लिखकर चारों शवों का पोस्टमार्टम कराने का आग्रह किया गया है। - डा. ओपी शुक्ला, प्रभारी चिकित्साधिकारी, काशी विद्यापीठ ब्लाक
गांव में बुखार फैलने की जानकारी होने के बाद तत्काल प्रभारी चिकित्साधिकारी को सूचना दी गई। गांव में मेडिकल टीम आई थी। पीडि़त ग्रामीणों के खून के नमूने टीम जांच के लिए ले गई। - हाजी मुनुरुद्दीन, ग्राम प्रधान, कोटवां
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स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों के प्रति लोगों में गुस्सा
लोहता। कोटवां के खरका में रहस्यमय बुखार से लगातार हो रही मौतों को लेकर ग्रामीण दहशत में तो हैं ही, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों के प्रति भी उनके मन में खासा गुस्सा है। गांव के मुन्नू पहलवान और मोहम्मद रफीक का कहना है कि घटना के बाद भी गांव में कोई बड़ा डाक्टर नहीं पहुंचा। महज खानापूर्ति करने के लिए मेडिकल टीम भेज दी गई। यही नहीं, जिले के प्रशासनिक अफसर भी घटना के प्रति बेपरवाह बने हुए हैं जबकि पीडि़तों की संख्या बढ़ती ही जा रही है। जनप्रतिनिधि भी महज चुनाव के समय दिखते हैं। ऐसे गाढ़े वक्त में भी कोई नेता नजर नहीं आ रहा।