वाराणसी। समाजवादी पार्टी ने चुनाव प्रचार के आखिरी दिन शनिवार को भव्य और राजसी रोडशो का आयोजन किया। मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव पहली बार शहर की सड़कों पर निकले तो जनता ने भी उनका जोरदार खैरमकदम किया। मलदहिया से गिरजाघर के बीच के ढाई किलोमीटर की दूरी तय करने में उन्हें ढाई घंटे से अधिक समय लग गए और रास्ते भर उन पर गुलाब, बेला और गेंदा के फूलों की बारिश होती रही। इस रोड शो के जरिए सपा ने सरकार की साख और मुख्यमंत्री की लोकप्रियता का एहसास कराया।
मलदहिया चौराहे पर दिन में 11 बजे से ही भीड़ जुटने लगी। नेता और समर्थक मुख्यमंत्री के आने तक नारेबाजी करते रहे और चौराहे पर नाचते भी रहे। मुख्यमंत्री दिन में एक बजकर 40 मिनट पर पहुंचे तो उसने हाथ मिलाने की होड़ लग गई। सरदार बल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को फूल मालाओं से सजाया गया था और सबको उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री माल्यार्पण करेंगे लेकिन वह सीधे पहले से सजे मैजिक वाहन पर कारागार मंत्री राजेेंद्र चौधरी और प्रत्याशी कैलाश चौरसिया के साथ सवार होकर चल पड़े। उनके वाहन के पीछे लंबा काफिला चल पड़ा।
विशुद्धानंद कानन आश्रम की चहारदीवारी पर चढ़े कार्यकर्ताओं ने जमकर फूल बरसाए। यह सिलसिला वहां से शुरू हुआ तो गिरजाघर तक कभी रुका ही नहीं। लहुराबीर से नई सड़क तक लाल टोपियां और टीशर्ट पहने कार्यकर्ताओं, प्ले काडों, सपा के झंडों पट गया था। रास्ते भर पार्टी के प्रचार गीत बजते रहे और कार्यकर्ता थिरकते रहे। मुख्यमंत्री से हाथ मिलाने, उनको स्मृति चिह्न और गदा भेंट करने और बड़ी मालाएं पहचाने की समर्थकों में होड़ लगी रही। स्नेहासिक्त लोगों के फूलों की बारिश से पूरी सड़क पीली और गुलाबी हो गई। रास्ते में खूब हरे-लाल गुब्बारे उड़ाए गए और रंगीन कागज के पटाखे चलाए गए। अपने नेता को देखने के लिए कार्यकर्ता डिवाइडर पर कतारबद्ध खड़े रहे। मुख्यमंत्री ने किसी को निराश नहीं किया। लहुराबीर, चेतगंज, नई सड़क में घरों की छतों से लोग मुख्यमंत्री की तस्वीरें खींचते रहे और पुष्प बरसाते रहे। फूलों की पंखुडि़यों से बार-बार वाहन का शीशा भर जाने के कारण चलाने में भी दिक्कत होते रहे।