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क्योटो में मंदिर संरक्षित, काशी में पुरसाहाल नहीं

Varanasi Updated Mon, 01 Sep 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। जापान के क्योटो शहर की तरह काशी भी मंदिरों का शहर है। क्योटो ने अपने मंदिरों को जस का तस संरक्षित रखा है जबकि काशी में मंदिरों के स्वरूप वक्त के साथ बदलते जा रहे हैं। कई पौराणिक महत्व के मंदिर अवैध कब्जे के शिकार हो गए हैं जबकि कुछ मंदिरों के गिर जाने के बाद प्रशासन की ओर से बनाने की अनुमति तक नहीं मिल रही। काशी के लोगों का कहना है कि क्योटो की तरह काशी के धरोहरों को संरक्षित करने के लिए स्पष्ट नीति बनाने की जरूरत है।
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काशी खंड में शिव के ही 511 मंदिरों का जिक्र है। इसके अलावा शिव परिवार, गणों और अन्य देवी देवताओं के भी इतने ही मंदिर यहां हैं। काशी में जेम्स प्रिंसेप के समय काशी में मंदिरों की संख्या 1000 के करीब आंकी गई थी जबकि 1868 में 1654 मंदिरों की गिनती की गई थी। क्योटो में 2000 हजार मंदिर हैं और सब संरक्षित हैं जबकि काशी के अधिकांश प्राचीन मंदिर और घाट जर्जर हालत में हैं। बालाजी मंदिर और गंगा महाल घाट स्थित राधाकृष्ण मंदिर ढह चुके हैं। मंदिरों के जीर्णोद्धार की स्पष्ट नीति नहीं होने के कारण उनके मरम्मत की इजाजत वाराणसी विकास प्राधिकरण से नहीं मिल पा रही है। संरक्षण नीति के अभाव में जहां एक तरफ तमाम मंदिर और घाट गिरने की कगार पर पहुंच गए हैं, वहीं दूसरी ओर मंदिरों पर धड़ाधड़ अवैध निर्माण हो रहे हैं। गुरुधाम मंदिर के नौबतखाने से मंदिर परिसर तक की जमीन पर कालोनी आबाद हो गई है जबकि मंदिर की बेशकीमती मूर्तियों को चोर उठा ले गए। तांत्रिक शैली में बने इस मंदिर का अब जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। राज्य पुरातत्व विभाग के संरक्षण में बने कंदवा मंदिर और पोखरे के आसपास कई नए मंदिर बन गए और कुछ बेशकीमती मूर्तियां जल, दूध आदि चढ़ाने से नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई हैं। पंचक्रोशी मार्ग में आने वाले 400 मंदिर में से अधिकांश खस्ताहाल हैं।
पूर्व मंत्री शतरूद्र प्रकाश कहते हैं, ‘काशी क्योटो से पुराना, मौलिक और जीवंत शहर है। इसका संरक्षण तीज, त्योहार और परंपरा के साथ करना होगा। यह नहीं भूलना चाहिए यहां नाटी इमली के भरतमिलाप और नागनथैया कई जीवंत धरोहर भी हैं। क्योटो की तकनीकी लेने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन काशी के विकास के लिए अपनी नीति तय करनी होगी।’ मेयर रामगोपाल मोहले को क्योटो में हुए समझौते पर उन्हें हस्ताक्षर करना था, लेकिन वह किन्हीं कारणों से जा नहीं पाए। राजदूत ने उनकी ओर से समझौते पर हस्ताक्षर किया है। मेयर ने समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि इससे प्राचीन शहर के विकास की आशा जगी है।
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