चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम को वैष्णो देवी की तर्ज पर विकसित करने के दावे तो खूब होते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई पहल नहीं होता। धाम में जरूरी सुविधाएं तो छोड़िए संचार सेवा तक के इंतजाम नहीं हैं।
मां पूर्णागिरि धाम में हर साल करीब 25 लाख लोग दर्शन को आते हैं। श्रद्धा के इस केंद्र से टनकपुर, बनबसा सहित बड़ी तादाद में लोगों की अर्थव्यवस्था जुड़ी है। सेलागाढ़ सहित कई गांव भी यहां से जुड़े हैं। मगर यहां संचार सेवा तक नहीं है। इक्का-दुक्का जगह पर निजी मोबाइल कंपनी के सिग्नल आते हैं। स्थिति यह है कि क्षेत्र में एक भी मोबाइल टावर नहीं है।
नेपाल सीमा से लगे इस 11 किमी क्षेत्र में संचार सुविधा को लेकर लंबे समय से लोग मांग कर रहे हैं। पूर्व बीडीसी सदस्य भुवन पांडेय, पंडित किशन तिवारी, मोहन पांडेय का कहना है कि बूम से लेकर मुख्य मंदिर तक संचार सेवाएं नहीं है। श्यामलाताल से कहीं-कहीं कुछ निजी कंपनियाें के सिग्नल पकड़ते हैं। लोग यहां बीएसएनएल का टावर लगाने की मांग कर रहे हैं।
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बीएसएनएल के मोबाइल टावर लगाए जाने का पिछले माह प्रस्ताव भेजा गया है। बीएसएनएल के अल्मोड़ा और नैनीताल स्थित महाप्रबंधक को स्थल चयन कर टावर लगाने को कहा गया है।
-नरेश दुर्गापाल, एसडीएम चंपावत