हरिद्वार। शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि जगद्गुरु परमात्मा से बड़ा है, पर वह परमात्मा नहीं है। गुरु में भगवद् बुद्धि होनी चाहिए। यह तभी आती है, जब भाव समर्पण का हो। साधना में गुरु का निर्देश अवश्य पालन करना चाहिए। दुर्भाग्य से आज अनेक गुरुओं ने परमात्मा की जगह लेनी भी शुरू कर दी है। इस मौके पर आश्रम में नारायण पादुका पूजन किया गया।
जगद्गुरु आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपनी बुद्धि, विवेक और चिंतन शक्ति का सदुपयोग नहीं करेगा तो वह पशुओं से भी निम्र स्थान पर पहुंच जाएगा। मनुष्य को ईश्वर ने यह शरीर प्रदान किया है। वास्तव में यह शरीर विचित्र देव मंदिर है। इस देह में स्वयं ईश्वर बैठा हुआ है। देह धारण करने का उद्देश्य यह है कि अपने हृदय में बसे राम की बात को सुनकर उसके अनुसार चलते हुए राम को पहचानने ही क्षमता विकसित की जाए। ऐसा होने पर वह राम का हो जाता है।
शंकराचार्य राजराजेश्वराश्रम ने कहा कि जो राग, द्वेष और विकारों में फंसा हुआ है, वह तो मनुष्य भी नहीं हो सकता। ऐसा व्यक्ति निकृष्ट कोटि का प्राणी है। कारण यह है कि आहार, निद्रा, भय और मैथुन तो पशुओं में भी व्याप्त है। यह मानव जीवन केवल सोने के लिए नहीं बना। यह जीवन तो साधना का द्वार है। वस्तुत: यह पिंड ब्रह्मांड का प्रतीक है। इसमें व्याप्त चैतन्य सर्वव्यापक परम चैतन्य का अंश है। जन्म-जन्मांतरों से यदि संस्कार प्राप्त हुए हों तभी गुरु की प्राप्ति होती है। गुरु तत्व की संपूर्ण शक्ति गुरु मंत्र में निहित है। गुरु प्रदंत बीज मंत्र शिष्य के हृदय अनंत: का प्रकाश प्रज्ज्वलित कर देता है। यह तभी संभव है, जब शिष्य इसके योग्य हो।
इस अवसर पर स्वामी प्रणवेन्द्र सरस्वती, स्वामी गंगेश्वरानंद व स्वामी भगवद आश्रम आदि ने भी गुरु तत्व पर विचार रखे। संचालन जगदीश गुप्ता द्वारा किया गया। भाजपा के प्रदेश ध्यक्ष अजय भट्ट ने भी पहुंचकर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम से आशीर्वाद लिया। भाजपा विधायक पुष्कर सिंह धामी और संजय गुप्ता ने भी उनका आशीर्वाद लिया।