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भविष्य में कंप्यूटर पर राज करेगी हिंदी!

अमेरिका से गिरीश रंजन तिवारी Updated Sun, 08 May 2016 01:21 PM IST
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हिंदी का भविष्य सुनहरा और उम्मीदों से भरा है। संभव है कि आज जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती, जल्द ही वह संभव हो जाए और आने वाले समय में कंप्यूटर पर हिंदी का राज हो।
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विश्व हिंदी सम्मेलन के दौरान पद्म विभूषण एलपी यारलागड्डा ने कहा कि नासा के भाषा विज्ञान के अध्यक्ष ने स्वयं ऐसी संभावना जताई है। संभावना का आधार भी ठोस है। पूरी तरह फोनेटिक होने और अनेक अन्य कारणों से यह कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए उपयुक्त है। यह मौखिक कमांड के भी सर्वाधिक उपयुक्त है।

इस बीच अमेरिका में तमाम संस्थाओं सहित व्यक्तिगत रूप से तमाम लोग हिंदी को बढ़ावा देने में लगे हैं। इसे लेकर अमेरिका में जितना उत्साह और आशावादी माहौल है, उतना पहले नहीं रहा। भारत की कंसुलेट जनरल रीवा दास गांगुली और डिप्टी कंसुलेट जनरल मनोज महापात्रा समेत विदेशी भी हिंदी को बढ़ावा देने में योगदान दे रहे हैं। अमेरिका दूतावास में वीजा का साक्षात्कार हिंदी में होने लगा है।
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न्यूयार्क विवि में हिंदी और उर्दू अध्ययन संस्थान की निदेशक प्रो. गेब्रिएला निक लोकप्रिय टीवी चैनल एशिया टीवी के माध्यम से हिंदी सिखाती हैं। हिंदी के व्यावहारिक ज्ञान के लिए हिंदी निबंध, वाद विवाद प्रतियोगिता, लेख इत्यादि से इसके लिए प्रेरित पुरस्कृत किया जाता है। प्रो. गैब्रिएला का मानना है कि हिंदी के माध्यम से ही भारतीय संस्कृति और जीवन शैली को समझा जा सकता है।

स्वीडन के उपासला विवि में इंडोलाजी में प्रोफेसर हेंज वर्नर वेसलर स्वीडन, अमेरिका, जर्मनी में हिंदी के विकास को समर्पित हैं। प्रो. हेंज का कहना है कि हिंदी को बढ़ावा देना उनके जीवन का लक्ष्य है। शिकागो की संस्था मंडी थियेटर ग्रुप अमेरिका के विभिन्न शहरों में नाटकों के माध्यम से हिंदी के विकास में जुटी है।

संयोजिका अलका शर्मा ने बताया कि उनकी संस्था प्रेमचंद, भारतेंदु, सफदर हाशमी, रवींद्रनाथ टैगोर इत्यादि के नाटकों का मंचन विभिन्न स्थानों व कई अवसरों पर कर चुकी है। हिंदी संगम फाउंडेशन संस्था के अध्यक्ष प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डा. विजय  मेहता हिंदी वाद विवाद प्रतियोगिता और हिंदी कवि सम्मेलन के माध्यम से हिंदी के विकास को समर्पित हैं।

फाउंडेशन के अशोक ओझा साल भर हिंदी के तमाम कार्यक्रमों के आयोजन में ही व्यस्त रहते हैं। उनकी संस्था हिंदी प्रेमियों को जोड़ने और संबंधित गतिविधियों का केंद्र है। तमाम प्रयासों के चलते अमेरिका में प्राथमिक से विवि स्तर तक अंग्रेजी पढ़ने और पढ़ाने वालों की संख्या बढ़ी है। भारत के डिप्टी कंसुलेट जनरल महापात्रा दक्षिण भारत से हैं, पर बेहतरीन हिंदी बोलते हैं। उत्साह से बताते हैं कि हिंदी संबंधी कार्यक्रमों के लिए भारत सरकार भरपूर संसाधन दे रही है।
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