हल्द्वानी। रकसिया नाला राक्षस से बना है, जो कभी भी राक्षस का रूप धारण कर सकता है। यदि ऐसा हुआ तो इसकी तबाही से नाले के इर्द-गिर्द बने मकानों के साथ ही आसपास के लोगों को भी भारी तबाही से कोई नहीं बचा सकता। सिंचाई विभाग के अधीन इस नाले की ओर विभाग भी कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इस नाले के अंतिम छोर पर बसे लोगों के लिए यह जगह नरक बन गया है।
नाले के किनारे-किनारे अगर आप करीब दस किमी का सफर तय करेंगे तो आपको हल्द्वानी के एक छोर पर बसे दमुवाढूंगा में तबाही तो दूसरे छोर पांडे नवाड़ में बर्बादी के निशान दिखाई देंगे। हजारों बीघा खेतों पर किसानों की मेहनत पर फैला कूड़ा हमारे निठल्ले जनप्रतिनिधियों की साख पर बट्टा लगाने के लिए काफी हैं। यह हालात तब हैं, जबकि रकसिया करीब दो साल से शांत है। भगवान न करे अब रकसिया नाराज हो। यदि ऐसा हुआ तो इस बार तबाही पिछले बार से अधिक होगी, क्योंकि दमुवाढूंगा से लालडांठ तक नाला कई जगह पूरी तरह बंद है। नाले के तल से लेकर उस पर बने पुल तक मलबा भरा पड़ा है। पानी निकलने का कहीं रास्ता नहीं है। तय है कि पानी की मुसीबत आई तो वह नहर के किनारे बसे करीब 70 हजार लोगों को घर में रहने नहीं देगी।
बता दें रकसिया नाला दमुवाढूंगा की पहाड़ी से निकलने वाले कई नालों से मिलकर बना है। बरसात के दिनों नाले में नदी के बराबर पानी होता है। लालडांठ के आसपास तबाही रोकने के इंतजाम सिंचाई विभाग ने किए हैं। सिंचाई विभाग ने इसके लिए ढाई करोड़ रुपये खर्च किए आगे काम करने के लिए चार करोड़ रुपये की और आवश्यकता है। ढाई करोड़ खर्च करने के बाद नाला बिड़ला स्कूल तक तो बरसात के दिनों में तबाही मचाता है। इससे नीचे 15 गांव के बीस हजार लोग साल भर खेतों की बर्बादी को देखते हैं। हिम्मतपुर बैजनाथ, आनंदपुर, हल्दूपोखरानायक, प्रेमपुर लोसज्ञानी ग्राम पंचायत रकसिया से बुरी तरह प्रभावित हैं।
पहले नहीं था इतना खतरनाक
रकसिया नाला हमेशा से इतना विकराल नहीं था। 1974 तक नाले के आसपास मकान भी नहीं बने थे। इस वजह से इसका पानी फैल जाता था, लेकिन इसके बाद तेजी से यहां आबादी बसी और अब पानी फैलकर लोगों के घरों में घुसता है। -युगल जोशी, मल्ली बमौरी
कभी कुसपिया नाला था नाम
दमुवाढूंगा में बांसी के गधेरे से शुरू होने वाला आज का रकसिया कभी कुसपिया नाले के नाम से जाना जाता था। पहले नाले की चौड़ाई अधिक थी और इसमें लोग कूड़ा भी नहीं डालते थे। आज लोग इस पर मकान बना रहे हैं। -प्रताप सिंह बिष्ट, मल्ली बमौरी
25 ट्रक पत्थर बहा ले गया नाला
दो साल पहले आई बरसात में नाला मेरे 25 ट्रक पत्थर बहा ले गया। पुलियाें के नीचे नाले ने सुरंग कर दी हैं। बरसात आई तो यह गिर भी सकते हैं। -जगन्नाथ जोशी, छड़ायल नायक
लाखों की फसल का नुकसान
बिड़ला से नीचे नाले को नियंत्रित करने के कोई इंतजाम नहीं हैं। अस्पताल तक के आसपास कूड़ा भर गया है। सड़कें नाले के पानी से बुरी तरह टूट चुकी हैं। कई बार शिकायत के बावजूद कोई ध्यान नहीं देता। -भवान सिंह बिष्ट, पांडे नवाड़
चारों और फैलता है पानी
नाले का पानी सालभर सताता है। राजारानी विहार, गुसांई पुर और पूरनपुर सहित कई गांव नाले की गंदगी से परेशान हैं। नाले का कूड़ा मंदिरों तक में घुस गया है। -अनिल, प्रेमपुर लोसज्ञानी