श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के लोककला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र चौरास में जश्न-ए-बचपन नाट्य महोत्सव शुरू हो गया है। महोत्सव के पहले दिन बाल कलाकारों ने रविंद्र नाथ टैगोर की ओर से लिखित नाटक काबुलीवाला का मंचन किया। बाल कलाकारों ने भावपूर्ण अभिनय करते हुए दर्शाया कि प्यार और स्नेह धर्म की दीवारों में बंधकर नहीं रहता।
लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के प्रेक्षागृह में बुधवार देर शाम पांच दिवसीय बाल नाट्य महोत्सव का शुभारंभ हुआ। महोत्सव का शुभारंभ गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एससी बागडी और प्रो. एसएस रावत ने दीप प्रज्वलित कर किया। महोत्सव के पहले दिन एमए थियेटर के छात्र महफूज आलम, तितिक्षा तिवारी व निशांत ठाकुर के निर्देशन में तैयार किए गए इस नाटक में नगर के चिल्ड्रन एकेडमी के बच्चों ने अपनी प्रतिभा का हुनर दिखाया। नाटक की पूरी कहानी काबुलीवाला (रहमत) और बच्ची (मिनी) के आसपास घूमती है। काबुलीवाला एक पठान है और मिनी हिंदू परिवार से है। काबुलीवाला सामान बेचने आता है और उसे छोटी बच्ची मिनी से मोह हो जाता है। मिनी को भी काबुलीवाले की इंतजारी रहती है। दोनों के स्नेह और वात्सल्य में धर्म की कोई दीवार आड़े नहीं आती है। काबुलीवाला मिनी से ही अपनी पुत्री के स्नेह को पूरा करता है। किसी कारणवश वह जेल चला जाता है। जब वह काफी अरसे बाद जेल से छूटता है, तो वह मिनी से मिलने दौड़ पड़ता है। अब मिनी बड़ी हो चुकी है और वह काबुलीवाला को भूल चुकी है। अंत में वह दुखी होकर चला जाता है। नाटक के पात्र आदित्य, प्रियांशु और भूमिका ने सशक्त अभिनय किया। कार्यक्रम का संचालन थियेटर की छात्रा गंगा कुमारी ने किया।