पिथौरागढ़। पेयजल किल्लत को लेकर आम नागरिकाें का गुस्सा सातवें आसमान पर है। जल संस्थान के अधिकारियों की कार्यप्रणाली को पेयजल संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। इसके विरोध में 25 जनवरी को प्रस्तावित तालाबंदी और घेराव को कामयाब बनाने के लिए विभिन्न संगठनों ने रणनीति तय की। बैठक में अब आरपार की लड़ाई लड़ने का ऐलान किया गया।
नगर पालिका सभागार में जाग उठा पहाड़ के संयोजक गोपू महर की अध्यक्षता में हुई बैठक में पिथौरागढ़ में जाड़ों में भी पेयजल किल्लत को भविष्य के लिए खतरनाक संकेत बताया गया। कहा गया कि अब तक यहां गर्मियों में ही पानी की मारामारी होती थी। लेकिन पहली बार जनवरी में भी लोग पानी को तरस रहे हैं। इसके लिए जन प्रतिनिधियों के अलावा मुख्य रूप से विभागीय हीलहवाली जिम्मेदार है।
जन मंच के संयोजक भगवान सिंह रावत ने आरोप लगाया कि कई बार गुजारिश करने के बाद भी विभाग की नींद नहीं खुली है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के पूर्व प्रवक्ता गेहराज पांडेय ने कहा कि पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों के पूरा नहीं होने से आम लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है। लोग अब इन समस्याओं का हर हाल में समाधान चाहते हैं। एलएम भट्ट ने कहा कि विभिन्न वार्डो में जन संपर्क कर आंदोलन को कामयाब बनाया जाएगा। भाजयुमो नेता गोलू पाठक ने तालाबंदी और घेराव को सफल बनाने के लिए सभी कार्यकर्ताओं को विभिन्न जिम्मेदारियां बांटी। बैठक में किरन महर, सत्य प्रकाश, गिरजा शंकर, दीपक चंद राजा, अशोक उपरारी आदि ने भी विचार रखे।