पिथौरागढ़। भारत-चीन व्यापार के लिए आपदा ग्रहण बन गई है। आपदा ने इस बार व्यापार में गिरावट की है। दोनों देशों के बीच पिछले साल की अपेक्षा इस बार अब तक 74 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। यहां से चीन की व्यापारिक मंडी जाने वाले कारोबारियों की तादाद भी कम हुई है।
भारत-चीन के बीच वर्ष 1992 से लिपुलेख दर्रे से व्यापारिक गतिविधियां चल रही है। साल 2008 को छोड़ लगातार हर साल ये व्यापार हुआ। लेकिन इस बार आपदा ने दोनों देशों के बीच व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। गर्ब्यांग से तवाघाट तक रास्तों के हाल बेहद खराब है। जिस कारण सामान लाने अथवा ले जाने में दुश्वारी हो रही है।
भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के ट्रेड अधिकारी केएस रावत ने बताया कि इस साल अब तक मात्र 68.60 लाख रुपये का कारोबार ही हुआ है। जिसमें 40.68 लाख रुपये आयात और 27.92 लाख रुपये का निर्यात हुआ है। जबकि पिछले साल सितंबर तक ये व्यापार 266.46 लाख रुपये का था। इस तरह इस बार व्यापार में 197.86 लाख रुपये (74.25 प्रतिशत) की गिरावट आई है। इस बार आयात होने वाली सामग्री में मुख्य रूप से पशम और सीमेंट शामिल है। जबकि चीन द्वारा खरीदी गई सामग्री में गुड़, मिस्री, गोला प्रमुख रहा। इस बार मात्र 42 व्यापारी ही जिले से कारोबार के लिए तकलाकोट मंडी पहुंच सके। जबकि पिछले साल ये आंकड़ा 119 का था। भारत-चीन व्यापार समिति के पदम सिंह रायप्पा, जीवन रौंकली, दीवान सिंह गर्ब्याल आदि का कहना है कि आपदा से तबाह रास्तों ने व्यापार पर असर डाला है। इस वजह से अधिकतर व्यापारियों ने अपने को कारोबार से दूर रखा।