थल से लेजम तक 1999 में बनी चार किलोमीटर सड़क पर लोक निर्माण विभाग अब तक डामरीकरण नहीं कर पाया है। सड़क के किनारे नालियां नहीं बनी हैं। बारिश के समय सड़क कीचड़ से भर जाती है। उसमें पैदल चलना भी कठिन होता है। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व विधायक नारायण राम लोनिवि के अफसरों की टीम के साथ क्षेत्र के भ्रमण पर गए थे। तब उन्होंने घोषणा की थी कि एक माह के भीतर सड़क पर डामर हो जाएगा, लेकिन चार माह बीतने को हैं, अब तक डामर बिछाने की कोई तैयारी नहीं की गई है।
इस सड़क से गोल, लेजम, चामी, भनारकोट, खितोली, आमथल, दड़मोली, अधौली, गडेरा आदि गांवों के लोग आवाजाही करते हैं। कई बार सड़क को पक्का करने की मांग को लेकर आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अब बारिश के सीजन में यह सड़क मलबे से पट जाएगी और चार महीने तक आवाजाही बंद हो जाएगी।
निर्माण की उच्चस्तरीय जांच जरूरी
स्थानीय निवासी बसंत लोहनी का कहना है कि सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय जांच की जानी जरूरी है। तभी यह पता चलेगा कि सड़क पर वास्तव में कितनी राशि खर्च हुई है और उससे कितने काम किए जाने थे। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि भी इस सड़क के मामले में लोगों को गुमराह करते आए हैं। अब जनता जांच की मांग को लेकर आंदोलन करेगी।
सड़क को लेकर सामूहिक धरना देंगे
सामाजिक कार्यकर्ता गिरीश पुनेठा का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए लोगों को लंबा आंदोलन करना पड़ा था। सड़क तो बनी, लेकिन उसका निर्माण सही ढंग से नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सड़क पर डामर बिछाने, नालियों का निर्माण करने के लिए अब विभाग पर दबाव बनाया जाएगा। यदि इस मामले में जल्दी कार्रवाई नहीं की गई तो फिर सभी गांवों के लोग धरना देंगे।