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...तो भूखे नहीं तड़पते आपदाग्रस्त

देहरादून/अंकित चौधरी Updated Wed, 03 Jul 2013 07:32 PM IST
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उत्तराखंड में आई आपदा का केंद्र रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और चमोली जिले रहे। तीनों जिलों में बाहर से आकर फंसे लाखों श्रद्धालुओं के लिए चॉपर से गिराया गया खाना ही जिंदगी बचाने का एकमात्र साधन था। लेकिन आपूर्ति विभाग के भरोसे रहने वाले अधिकांश स्थानीय लोग भी पेट भरने को आसमां तकने को मजबूर थे।
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वजह यह कि आपदा के बाद संपर्क मार्ग बह गए थे और घरों में राशन नहीं था। उस पर तीनों जिलों की अप्रैल, मई और जून की तीन चौथाई खाद्य सामग्री मंडल के बेस गोदामों में डंप थी। इसे समय पर उठाया गया होता तो स्थानीय लोग अपना पेट भर सकते थे और फंसे श्रद्धालुओं की मदद भी संभव हो सकती थी।

उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली जिले में सरकार की तरफ से बंटने वाले राशन की सप्लाई ऋषिकेश, विकासनगर, श्रीनगर और शिमली के गोदामों से होती है। इन गोदामों से डीएसओ को अपने जिले के हिसाब से मिले राशन (गेहूं, चावल और चीनी) को उठाना होता है। लेकिन आपदा प्रभावित तीनों जिलों के डीएसओ ने समय रहते राशन नहीं उठवाया।
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जबकि यह पूर्व अनुमान रहता है कि बरसात में कई पहाड़ी संपर्क मार्ग बह जाते हैं। बावजूद इसके एडवांस कोटा उठाने की बात तो दूर स्वीकृत कोटा भी बेस गोदामों में डंप रखा था। जबकि मंडल स्तर से तीनों जिलों के डीएसओ से बार-बार सप्लाई उठाने का दबाव बनाया जा रहा था। पर किसी के कान पर जूं नहीं रेंगी।

एक हफ्ते में भेजा 225 ट्रक अनाज
आपदा के बाद पिछले एक सप्ताह से तीनों जिलों के पूर्ति अधिकारी करीब 225 ट्रक खाद्य सामग्री मंगा चुके हैं। इसमें मंगलवार को 70 और बुधवार को 55 ट्रक सामग्री तीनों जिलों में गई है। एक ट्रक से एक बार में करीब 90 टन सामग्री जाती है।

यह भी रहा कोटा उठने में देरी का कारण:

देरी से हुआ ट्रांसपोर्टर का टेंडर
सप्लाई के लिए केंद्रीय गोदाम से बेस गोदाम और बेस गोदाम से जिले तक पहुंचने के लिए अलग-अलग ट्रांसपोर्टर का ठेका होता है। इसे प्रतिवर्ष 31 मार्च तक फाइनल करना होता है। लेकिन इस बार यह ठेका 15 से 30 जून के बीच हुआ। इससे सप्लाई ले जाने के लिए वाहनों की कमी रही और पहले वाले ट्रांसपोर्टर भी रेट बढ़ने के चक्कर में जाने के लिए तैयार नहीं थे।

उत्तरकाशी में नहीं था सप्लाई इंस्पेक्टर
बेस गोदाम से कोटा लेते समय जिले के सप्लाई इंस्पेक्टर की मौके पर मौजूदगी जरूरी है। लेकिन उत्तरकाशी के लिए ऋषिकेश गोदाम से कोटा उठाने वाले सप्लाई इंस्पेक्टर 30 अप्रैल को रिटायर हो गए थे। लेकिन इनकी जगह उत्तरकाशी डीएसओ ने किसी अन्य इंस्पेक्टर को नहीं लगाया। इससे उत्तरकाशी का कोटा नहीं उठ पाया। अब आपदा के बाद आनन फानन में इंस्पेक्टर लगाया गया है।

मिल से चीनी का उठान शुरू
सभी योजनाओं के तहत गढ़वाल मंडल में प्रतिमाह 3479 मीट्रिक टन चीनी का कोटा स्वीकृत है। मंगलवार से डोईवाला शुगर मिली से चीनी का उठान शुरू हुआ। दो दिन में 12 ट्रक चीनी मिल गोदाम से बेस गोदामों में पहुंची।

बेस गोदामों में राशन की कोई कमी नहीं रही। हां इतना जरूर है इसे डीएसओ ने समय पर नहीं उठवाया। लेकिन पिछले एक हफ्ते से तीनों जिलों में बड़ी मात्रा में राशन की आपूर्ति जा रही है। -एके गुप्ता, रीजनल फूड कंट्रोलर
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