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What is el nino: क्या है अल नीनो? कभी खत्म कर दी थी दुनिया 4 फीसदी आबादी, 150 साल पहले मचाई थी भीषण तबाही

फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: Dharmendra Kumar Singh Updated Fri, 12 Jun 2026 05:40 PM IST
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सार

What is el nino: अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने अल नीनो की वापस की आधिकारिक रूप घोषणा कर दी है। इसके कारण पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है। आइए जानते हैं कि आखिर अल नीनो क्या है? 

What is el nino which killed 4 percent world population el nino kya hai in hindi
क्या है अल नीनो? कभी खत्म कर दी थी दुनिया 4 फीसदी आबादी - फोटो : AI
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विस्तार

What is el nino: अल नीनो की वजह से भारत समेत पूरी दुनिया में मौसम पैटर्न बदलने का खतरा मंडरा रहा है। इसके कारण भारत में सूखा और भीषण गर्मी पड़ सकती है। दक्षिण-पश्चिम मानसून पर गहरा असर डाल सकता है। इसके कारण देश के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। 



अल नीनो को लेकर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका के राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) ने अल नीनो के आने की आधिकारिक रूप से घोषणा कर दी है। इसके 2026-2027 की सर्दियों तक और ताकतवर होने की संभावना है। अल-नीनो ने 1876 से 1878 के बीच दुनियाभर में भीषण तबाही मचाई थी। इस दौरान करीब 5 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी। कहा जाता है कि अल नीनो के कारण दुनिया की 4 फीसदी आबादी खत्म हो गई थी। आइए जानते हैं आखिर अल नीनो क्या है, जिससे पूरी दुनिया की चिंता बढ़ गई है। 
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क्या है अल नीनो? What is el nino 

अल नीनो एक प्राकृतिक और मौसमी जलवायु घटना है, जो प्रशांत महासागर में होती है। इस दौरान मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की समुद्री सतह का तापमान सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इससे पूरे इलाके में तापमान बढ़ जाता है। इसकी वजह से दुनियाभर में मौसम, हवाओं और बारिश का पैटर्न बदल जाता है। इसके कारण दुनिया के कुछ इलाकों में बारिश और बाढ़ आती है, जबकि कुछ इलाकों को भीषण गर्मी और सूखे सामना करना पड़ता है। 
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कैसे बनता है अल नीनो? 

सामान्य परिस्थितियों में भूमध्य रेखा के पास चलने वाली व्यापारिक हवाएं गर्म पानी को पूर्व से पश्चिम की तरफ धकेलती हैं। यानी दक्षिण अमेरिका से एशिया और ऑस्ट्रेलिया की तरफ लेकर जाती है। लेकिन अल नीनो के समय ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं, जिससे गर्म पानी वापस पूर्व की तरफ पेरू के तटों की ओर इकट्ठा होने लगता और समुद्र का तापमान सामान्य से ज्यादा बढ़ जाता है। 

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अल नीनो से भारत में सूखा और पड़ती है भीषण गर्मी

अल नीनो की वजह भारत में मानसून प्रभावित होता है। इसके कारण सामान्य से कम बारिश होती है, क्योंकि अल नीनो ऊपर चलने वाली हवाओं को प्रभावित करता है। सामान्य मानसून के दौरान गर्म और नमी वाली हवाएं भारत आती हैं, लेकिन जब अल-नीनो आता है, तो इंडोनेशिया और भारत के ऊपर

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सामान्य मॉनसून में, गर्म और नम हवा भारत की ओर आती है. लेकिन अल-नीनो के दौरान इंडोनेशिया और भारत के ऊपर वायुमंडलीय दबाव बढ़ जाता है, जिससे बादलों के बनने और बारिश होने में रुकावट पैदा करता है। इसके कारण सूखा, गर्मी और अनियमित बारिश होती है। 

 

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