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हादसा और सवाल: दिल्ली में बहुमंजिला इमारत गिरने की वजह घोर प्रशासनिक लापरवाही, अवैध निर्माण के खिलाफ सख्ती अहम
अमर उजाला
Published by: Pavan
Updated Tue, 02 Jun 2026 08:12 AM IST
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सार
दिल्ली के साकेत में एक बहुमंजिला इमारत के गिरने की घटना दुखद होने के साथ घोर प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा भी है। सरकार व प्रशासन को न सिर्फ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने हेतु अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कदम भी उठाने चाहिए।
Delhi Building Collapses
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली के साकेत में सैदुल्लाजाब इलाके में ताश के पत्तों की तरह एक बहुमंजिला इमारत के गिरने से छह लोगों, जिनमें कुछ छात्र भी हैं, की मौत एवं कुछ के घायल होने की घटना दुखद तो है ही, यह घोर प्रशासनिक लापरवाही का भी उदाहरण है। बीती शनिवार शाम को अचानक हुए इस हादसे से आसपास के इलाके में मलबा एवं धूल का गुबार फैलने से अफरातफरी मच गई।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस इमारत में अवैध रूप से दो मंजिलों का निर्माण कार्य पहले ही किया गया था, जबकि तीसरी मंजिल का निर्माण कार्य जारी था। कमजोर ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के कारण इमारत भरभराकर गिर गई, जिसका मलबा बगल की कैंटीन पर गिरा, जहां कई छात्र खाना खा रहे थे। गौरतलब है कि एमसीडी ने अनधिकृत निर्माण की सुनवाई के दौरान 13 अप्रैल को ही दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि इस इमारत में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। हैरत की बात है कि दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने अदालत के समक्ष झूठ बोलने में भी कोई संकोच नहीं किया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेशक हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं और दिल्ली नगर निगम ने लापरवाही के आरोप में दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है, पर अवैध निर्माण तथा उसके भ्रष्ट तंत्र की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है। असल में, देश में हादसों के बाद जांच तो बिठा दी जाती है, लेकिन उनसे कोई सबक नहीं लिया जाता। थोड़े दिन चर्चा होती है, फिर सब कुछ पूर्ववत चलने लगता है, निलंबित अधिकारी भी पुनः लौट आते हैं, नतीजतन सुधार नहीं हो पाता।
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हालिया मामले में मकान मालिक एवं ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मकान मालिक को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। दरअसल, जिस इलाके में यह हादसा हुआ है, वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का केंद्र है, जहां किराये पर आवासीय घरों की मांग रहती है। इसी कारण मकान मालिक अवैध निर्माण करते हैं और मजबूरी में छात्र जान जोखिम में डालकर इनमें रहते हैं। इलाके की कई इमारतों में सीढ़ियां संकरी हैं, तो कई में अग्नि सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है।
अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही से इमारतों के साथ कई परिवारों के सपने भी ध्वस्त हो जाते हैं। इसलिए, सरकार और प्रशासन को न सिर्फ जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इलाके की इमारतों की गहन जांच करते हुए अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, इस इमारत में अवैध रूप से दो मंजिलों का निर्माण कार्य पहले ही किया गया था, जबकि तीसरी मंजिल का निर्माण कार्य जारी था। कमजोर ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ने के कारण इमारत भरभराकर गिर गई, जिसका मलबा बगल की कैंटीन पर गिरा, जहां कई छात्र खाना खा रहे थे। गौरतलब है कि एमसीडी ने अनधिकृत निर्माण की सुनवाई के दौरान 13 अप्रैल को ही दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि इस इमारत में किसी प्रकार का निर्माण कार्य नहीं चल रहा है। हैरत की बात है कि दिल्ली नगर निगम के अधिकारियों ने अदालत के समक्ष झूठ बोलने में भी कोई संकोच नहीं किया।
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दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बेशक हादसे की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं और दिल्ली नगर निगम ने लापरवाही के आरोप में दो इंजीनियरों को निलंबित कर दिया है, पर अवैध निर्माण तथा उसके भ्रष्ट तंत्र की जवाबदेही तय करने के लिए सख्त कदम उठाए जाने की जरूरत है। असल में, देश में हादसों के बाद जांच तो बिठा दी जाती है, लेकिन उनसे कोई सबक नहीं लिया जाता। थोड़े दिन चर्चा होती है, फिर सब कुछ पूर्ववत चलने लगता है, निलंबित अधिकारी भी पुनः लौट आते हैं, नतीजतन सुधार नहीं हो पाता।
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हालिया मामले में मकान मालिक एवं ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है और मकान मालिक को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। दरअसल, जिस इलाके में यह हादसा हुआ है, वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों का केंद्र है, जहां किराये पर आवासीय घरों की मांग रहती है। इसी कारण मकान मालिक अवैध निर्माण करते हैं और मजबूरी में छात्र जान जोखिम में डालकर इनमें रहते हैं। इलाके की कई इमारतों में सीढ़ियां संकरी हैं, तो कई में अग्नि सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, जिसका खामियाजा निर्दोष लोगों को भुगतना पड़ता है।
अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही से इमारतों के साथ कई परिवारों के सपने भी ध्वस्त हो जाते हैं। इसलिए, सरकार और प्रशासन को न सिर्फ जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, बल्कि ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए इलाके की इमारतों की गहन जांच करते हुए अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कदम उठाने चाहिए।